घर का चुल्हा जलाने के लिए जान को जोखिम में डालकर श्रमिक कर रहे हैं काम

घर का चुल्हा जलाने के लिए जान को जोखिम में डालकर श्रमिक कर रहे हैं काम

श्रम विभाग के अधिकारियों ने आखों पर बांध रखी है पट्टी

सड़कों पर ही नही इमारतों पर भी रूल्स की हो रही है अनदेखी

ऋषिकेश-महज पांच सौ रूपये की दिहाड़ी के लिए जान को जोखिम में डालकर काम करते हैं श्रमिक।यकीन ना आये तो शहर की इमारतों पर नजर दौड़ा लिजिए जहां नवनिर्माण के साथ ही उनपर रंगाई पुताई करते हुए आपको श्रमिक दिख जायेंगे।



महानगरों के साथ साथ  तीर्थ नगरी ऋषिकेश में भी बहुमंजिला इमारतों पर श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर ठेकेदार और श्रम विभाग दोनों की उदासीनता श्रमिकों की जान के लिए खतरा बनी हुई है। बिना सुरक्षा उपायों के श्रमिकों की जान जोखिम में डालकर काम कराया जा रहा है। दो वक्त की रोटी की खातिर अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर काम करने वाले श्रमिकों के साथ हादसा होने पर न तो विभाग उनकी मदद करता है और न ठेकेदार कोई खास मदद करते हैं।शहर में कई स्थानों पर बहुमंजिला इमारतों के निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन जगहों पर श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर ठेकेदारों की लापरवाही और श्रम विभाग के अधिकारियों की उदासीनता देखी जा सकती है। कार्यस्थल पर जहां जमीन पर काम करने वाले श्रमिकों को हेलमेट मुहैया नहीं कराए जाते वहीं ऊपर की मंजिलों पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए भी सुरक्षा इंतजाम के रूप में जाल वगैरह नहीं लगाए जाते ताकि नीचे गिरने पर जाल में फंसने से उनकी जान बच सके।कुछ यही हाल पुरानी बिल्डिंगों का भी है।शहर में बहुमंजिला इमारतों की रंगाई पुताई और सफाई के दौरान भी श्रमिकों की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है। ऊंची- ऊंची इमारतों में रंग रोगन के लिए ठेकेदार द्वारा सुरक्षा के उपाय किए बिना ही मजदूरों को काम पर लगा दिया जाता है जिससे जरा सी चूक होने पर वे असमय ही काल के गाल में समा जाते हैं और उनके परिवार के सामने भूखों मरने की नौबत आ जाती है।हेरत की बात ये भी है कि श्रम विभाग श्रमिकों की सुरक्षा नियमों का पालन कराने को लेकर यहां गंभीर नजर नही है।ऐसे में कह सकते हैं कि श्रम विभाग की आखों की पट्टी शायद किसी हादसे के होने के बाद ही खुलेगी।

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: