परमार्थ निकेतन में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का शुभारम्भ

परमार्थ निकेतन में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का शुभारम्भ

आचार्य दिलीप के श्रीमुख से हो रही सात दिवसीय कथा

श्रीमद्भागवत कथा ‘‘भक्ति योग’’ का अद्भुत ग्रंथ-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश – परमार्थ निकेतन में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारम्भ आज हो गया । परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती के आशीर्वाद से श्रावण माह के दिव्य अवसर पर प्रकृति और पर्यावरण को समर्पित श्रीमद्भागवत कथा आचार्य दिलीप के श्रीमुख से सम्पन्न हो रही हैं ।


स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि कथा श्रवण कर कथा के संदेशों और सार तत्व को व्यावहारिक जीवन में उतारना अत्यंत आवश्यक है। कथायें हमें प्रकृति से संबंध स्थापित कर जीवन को सद्मार्ग पर चलाने का संदेश देती हैं। कथा श्रवण करने से जीवन में सद्गुण और सद्व्यवहार में वृद्धि होती हैं।स्वामी चिदानंद ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ‘‘भक्ति योग’’ का अद्भुत ग्रंथ है। भक्ति के रस भाव का दिव्य निरूपण श्रीमद्भागवत कथा हमें कराती हैं । श्रीमद्भागवत को मोक्ष दायिनी कहा गया है क्योंकि इसके श्रवण से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य प्रभु के गुणानुवाद का श्रवण कर शरणागति को प्राप्त कर सकता है इसीलिए समय निकालकर सभी को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। हमारे शास्त्रों में उल्लेखित कथाओं का श्रवण कर बच्चों को संस्कारवान बनाया जा सकता हैं। कहा जाता है कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही प्राणी मात्र का कल्याण संभव है।आचार्य दिलीप ने व्यासपीठ से श्रीमद्भगवत माहात्म्य ज्ञान का वर्णन करते धुंधकारी एवं गौकर्ण के चरित्र का वर्णन किया। आज की दिव्य कथा में राजा परीक्षित के जन्म की कथा सुनाई। तत्पश्चात उनके भक्तिमय संगीत से सभी साधक मंत्र मुग्ध हो गये। उन्होंने कहा कि प्रभु की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से हमें धर्मानुसार आचरण करने का संदेश देते हैं। श्रीमद्भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है। निर्मल मन और स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने से परमानन्द की प्राप्ति होती है।आचार्य दिलीप ने आज धुंधकारी और गौकर्ण के जीवन और कर्मो के बारे में विस्तार से बताया सभी श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर कथा, भजन और संगीत का आनन्द लिया।इस अवसर पर गंगा नन्दिनी, नन्दबाला, स्वामी सेवानन्द कृष्ण कुमार, स्पेन से आयी मोनिका, रूस से ओल्गा डोरोगेवा, यूके से लाॅरेन एमी वाॅलवर्क, संगीता गोस्वामी, मोनिका मुनोज़ी और गुजरात से आये साधक उपस्थित रहे।

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