तीर्थ नगरी में धड़ल्ले से हो रहा पालीथिन का उपयोग|!

तीर्थ नगरी में धड़ल्ले से हो रहा पालीथिन का उपयोग|!

निगम का प्रशासन का विक्रेताओं में नही दिख रहा खौफ

ऋषिकेश-नियम तो बन गए लेकिन इस पर अमल कितना हो रहा है, यह देखने वाली बात है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर एक जुलाई से प्रतिबंध कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित नजर आ रहा है। बाजार में पालिथिन समेत उन सभी सामग्रियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। कहीं खुलेआम इसका प्रयोग हो रहा है तो कहीं चोरी-छिपे। ऐसा तब हो रहा है जब नगर निगम की टीम इसके खिलाफ अभियान भी चला रही है।



तीर्थ नगरी ऋषिकेश में अभी यात्रा सीजन चल रहा है।रायवाला से लेकर लक्षमण झूला तक बड़ी संख्या में सड़कों किनारे ठेली खोमचे वाले अलग अलग खाने पीने का सामान बेच रहे हैं।प्रशासन की थोड़ी सख्ती के बाद
ठेले खोमचे वालों ने सिर्फ इतना ही किया कि पालिथिन जेब में रख ली है, जबकि बाजारों में प्‍लास्टिक के गिलास, प्लेट आदि अभी भी बेचे जा रहे हैं।उधर नगर निगम की टीम भी लगातार अभियान चलाकर शहर को सिंंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त कराने की मुहिम में जुटी हुई है लेकिन शुरूआती चरण में फिलहाल तो निगम की टीम का कोई खास खौफ लोगों में देखने को नही मिलता दिखाई दे रहा है।बता दें कि सिंगल यूज प्‍लास्टिक में 19 प्रकार की सामग्री प्रतिबंधित हैं।इंकी बिक्री व इस्तेमाल पर रोक है।लेकिन यह भी सच है कि इसके थोक व्यापारियों पर कार्रवाई का कोई खौफ नहीं है। नगर निगम की टीम ऐसे स्थानों की ओर देख भी नहीं रही है, जहां से यह फुटकर दुकानदारों तक यह पहुुंचाई जाती है। ऐसे में फुटकर दुकानदार जैसे ठेले खोमचे वाले, मिष्ठान, सब्जी और फल विक्रेता, राशन के दुकानदार और होटलों में इनका इस्तेमाल हो रहा है।

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