ट्रैफिक जाम के मामले में दिल्ली बना ‘ऋषिकेश’

ट्रैफिक जाम के मामले में दिल्ली बना ‘ऋषिकेश’

देवभूमि में नासूर बनी ट्रेफिक जाम की समस्या

यातायत व्यवस्था को सुधारने की तमाम कवायद हुई फेल

ऋषिकेश-कोस-कोस पर बदले पानी और चार कोस पर वाणी अर्थात् भारत में हर एक कोस दूर जाने पर पानी का स्वाद बदल जाता है और 4 कोस पर भाषा यानी वाणी भी बदल जाती है, इसीलिए हमारे देश को भिन्नताओं का देश कहते हैं, लेकिन इतनी भिन्नताओं के बावजूद एक सामान्यता ऐसी है जो आपको अक्सर तमाम शहरों में एक जैसी दिखाई देगी और वह है बढ़ती हुई गाड़ियां और उनका कोलाहल और ट्रैफिक जाम झेलती सड़कें।


अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ऋषिकेश भी इस मामले में अपवाद साबित नही हुई है।वैसे यूं तो शहर में ट्रेफिक जाम की समस्या वर्षों पुरानी है लेकिन इस वर्ष दो वर्ष के लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई चारधाम यात्रा के बाद यह समस्या अपने चरम पर दिखाई दे रही है।शहर में रोजाना जिस प्रकार कई कई
किमी लंबे जाम की तस्वीरे देखने को मिल रही हैं उससे तो कई मर्तबा यह यकीन कर पाना मुश्किल हो जाता है कि यह देवभूमि ऋषिकेश ही या फिर देश की राजधानी दिल्ली।इस गंभीर समस्या के बारे में व्यापार सभा के कोषाध्यक्ष ललित जिंदल का कहना है कि जिस प्रकार शहर में यातायात बड़ता चला जा रहा है उसी के मुताबिक सड़कों का निर्माण करना भी जरूरी है और इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि सड़कें बनें वे टिकाऊ भी हों। शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी मानव जौहर के मुताबिक ऋषिकेश में ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार पेचीदा हो रही है।इसकी वजह राष्ट्रीय राजमार्ग की खस्ताहाल सड़क भी कहीं ना कही मुख्य कारण साबित हो रही है।उन्होंने कहा कि टूटी-फूटी और गड्ढों से भरी सड़कें न सिर्फ ट्रैफिक जाम को बढ़ाती हैं बल्कि हर साल ना जाने कितने लोगों की मौत की वजह भी बनती हैं।ऋषिकेश ज्वैलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हितेंद्र पंवार के अनुसार लोगों ने सड़कों को ही अपनी पार्किंग की जगह बना लिया है। लोग सरकारी जगहों को भी अपनी समझकर स्कूटर या गाड़ी खड़ी कर देते हैं। दरअसल, जिस हिसाब से गाड़ियां बढ़ी हैं उस अनुपात में पार्किंग स्पेस के बारे में कभी कोई योजना ही नहीं बनी। अवैध पार्किंग के कारण सड़कें ही गायब होती जा रही है और गाड़ियां खड़ी होने की वजह से चलने की जगह ही नहीं।शहर मेंं ट्रेफिक जाम की यह भी प्रमुख वजह है।

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