सेवा सप्ताह में कल्चर और नेचर की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान

सेवा सप्ताह में कल्चर और नेचर की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान

ऋषिकेश- 75 वें अमृत महोत्सव के अवसर पर परमार्थ गंगा तट पर पर्यावरण और नदियों को समर्पित मानस कथा और स्वामी चिदानन्द सरस्वती के अवतरण दिवस के अवसर पर मनायें जा रहें सेवा सप्ताह के दूसरे दिन को संस्कृति और विरासत के लिए समर्पित किया गया है।


परमार्थ अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, रमेश भाई ओझा, राज्यपाल उत्तराखंड गुरमीत सिंह , संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल , मानस कथाकार संत मुरलीधर , साध्वी भगवती सरस्वती संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित आज के दिव्य कार्यक्रम की शुरूआत की।
सेवा सप्ताह कि दूसरे दिन मानस कथा के दिव्य मंच से स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि इस देश का हर सैनिक किसी संत से कम नहीं है। एक-एक सैनिक 33 करोड़ देशवासियों की रक्षा के लिये समर्पित है। भारत जीता जागता राष्ट्र है और हर भारतीय परमात्मा का साक्षात हस्ताक्षर है। राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि परमार्थ निकेतन के ये क्षण और यह स्थान दिव्य, भव्य और पवित्र है। मां गंगा के तट पर श्री राम कथा और पूज्य आत्माओं के साथ दिव्यता का अनुभव हो रहा है। यहां पर एक अलग ही राग है। जीवन भी एक लगन है; एक राग है। उन्होंने स्वामी चिदानंद को जन्मदिन की शुभकामनायें देते हुये कहा कि आपने प्रकृति और नदियों के लिये अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है।राष्ट्र, समाज, मानवता, दूसरों के लिये समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि सैनिक, संत, सेवक और सिख में कोई फर्क नहीं होता। संत श्री रमेश भाई ओझा ने कहा कि सेवामय जीवन जीने वाले महापुरूष के 70 वें अवतरण उत्सव पर सेवा सप्ताह का आयोजन अतुलनीय है।संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि गुरू कृपा से जो प्राप्त होता है वह धन कभी समाप्त नहीं होता और न कोई उसे चोरी कर सकता है। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि पूज्य स्वामी चिदानंद का 70 वां जन्म दिवस हम सब सेवा सप्ताह के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने अपना पूरा जन्म सनातन धर्म, संस्कृति, संस्कारों और दिव्य विरासत के लिये समर्पित किया है।
इस अवसर पर स्वामी चिदानंद ने ईमामी फाउंडेशन के राधेश्याम गोयनका के कार्यों की भी सराहना की।

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