भारतीय वैज्ञानिक और नीति आयोग के वरिष्ठ सदस्य वी. के. सारस्वत पहुंचे परमार्थ निकेतन

भारतीय वैज्ञानिक और नीति आयोग के वरिष्ठ सदस्य वी. के. सारस्वत पहुंचे परमार्थ निकेतन

ऋषिकेश- परमार्थ निकेतन में भारतीय वैज्ञानिक विजय कुमार सारस्वत सपरिवार परमार्थ निकेतन पहुंचे। उन्होंने स्वामी चिदानन्द सरस्वती से भेंट कर आशीर्वाद लिया । इस अवसर पर भारतीय वैज्ञानिक कर्नल कासी सहित अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।



स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने इस अवसर पर कहा कि उत्तराखंड राज्य पहाड़ी राज्य है और इसकी समस्यायें भी पहाड़ की तरह है। अतः यहां पर रहने वालों की पीड़ा हम सभी के लिये प्रेरणा बनें। यहां के उत्पादों से स्थानीय लोगों को रोजगार प्राप्त हो। कहा कि, चीड़ के वृक्षों में से ऊर्जा का निर्माण कर उत्तराखंड की पलायन की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है तथा इससे वनाग्नि की समस्याओं का भी समाधान प्राप्त होगा। उत्तराखंड में गर्मी के लगभग छह महीनों में फारेस्ट फायर की 1,000 से अधिक घटनाएं होती है जिससे भारी नुकसान होता है, इसका भी समाधान मिलेगा। साथ ही चीड़ के पत्ते और परोल को एकत्र करने से स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार प्राप्त होगा।भारतीय वैज्ञानिक विजय कुमार सारस्वत ने बताया चीड़ के वृक्षों, कृषि-उद्योग तथा वन्य क्षेत्रों के क्रियाकलापों के अंतर्गत बड़ी मात्रा में बायोमास सामग्री उत्पन्न होती है। लगभग 500 मिलियन टन कृषि तथा कृषि-उद्योग अवशिष्ट हर साल पैदा किया जाता है जो कि ताप ऊर्जा के रूप में यह मात्रा तकरीबन 175 मिलियन टन तेल के बराबर है। इन सामग्रियों के बायोमास से पैदा होने वाली बिजली की संभावित मात्रा 100000 मेगावाट तक पहुँच सकती है ।माँ गंगा के पावन तट पर स्वामी चिदानंद ने पुष्प हार और रूद्राक्ष के पौधे से सभी वरिष्ठ वैज्ञानिकों का अभिनन्दन किया तथा सभी ने मिलकर विश्व ग्लोब का जलाभिषेक कर जल संरक्षण का संकल्प लिया।

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