श्रीमद् भागवत कथा में धूमधाम से मना श्री कृष्ण जन्मोत्सव, झूम उठे श्रद्धालु

श्रीमद् भागवत कथा में धूमधाम से मना श्री कृष्ण जन्मोत्सव, झूम उठे श्रद्धालु

ऋषिकेश-शीशम झाड़ी स्थित कात्यायनी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कृष्ण जन्म के प्रसंग शुरू होते ही पांडाल में मौजूद श्रद्धालु नंद के घर आनंद भया जय कन्हैया लाल की भजनों के साथ झूम उठे। वहीं कथा आयोजक दीपक भाई व मंदिर के संस्थापक गुरूविंदर सलूजा ने मक्खन मिश्री के प्रसाद का भोग लगाकर वितरित किया।



मंगलवार को कथा प्रवचन करते हुए सुविख्यात कथा वाचक चेतन भाई ने कहा कि जीवन में जब भी भगवत नाम सुनने का अवसर प्राप्त हो, उससे विमुख नहीं होना चाहिए। भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि जब जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब तब परमात्मा अवतार धारण करके धरती पर धर्म की स्थापना करते हैं।अपने अमृत प्रवचनों में उन्होंने कहा कि शाति की तलाश हर मानव को रहती है। इसलिए वह मृग की तरह सारी उम्र भटकता ही रहता है, जबकि कस्तूरी तो मृग की नाभि में रहती है। ठीक इसी प्रकार शाति मनुष्य के भीतर होती है और वह उसे जगत में खोजता फिरता है। शाति कभी भौतिक सुख साधनों और बाहरी जगत से नहीं मिल सकती। यह तो अपने अंदर से और संतोषी मनोवृत्ति से ही मिलती है। शाति बाहर की नहीं भीतर की चीज है।कथा श्रवण करने वालों में क्षेत्रवासियों सहित बड़ी संख्या में नगर के धर्मप्रेमी शामिल रहे।

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