शहर की सड़कों पर दौड़ रहे जुगाड़ वाहन दे रहे हैं हादसों को दस्तक!

शहर की सड़कों पर दौड़ रहे जुगाड़ वाहन दे रहे हैं हादसों को दस्तक!

यातायात नियमों की शहर में खुलकर उढ़ रही हैं धज्जियां

ऋषिकेश- कुछ वर्ष पहले आई फुकरे फिल्म का गीत कर ले जुगाड़ कर ले कर ले कोई जुगाड़ इन दिनों तीर्थ नगरी की सड़कों पर सरपट दोड़ते जुुगाड़ वाहनों को देख बिल्कुल फिट बेठताा दिखाई दे रहा है।विडंबना यह भी की यह इंडिया है मेरी जान यहां अनेकों काम जुगाड़ से भी करने पड़ते हैं।मामला दो वक्त की रोटी के इंतजाम का हो तो फिर जान को जोखिम पर भी डालने में भी कुछ लोग परहेज नही करते।



तीर्थ नगरी ऋषिकेश में इन दिनों जुगाड़ वाहन सड़कों पर फर्राटा भरते हुए खूब दिखाई दे रहे हैं।रिक्शा, साइकिल और आटो के समावेश के साथ कुशल कारीगरों द्वारा तैयार किए गये यह जुगाड़ वाहन तकरीबन बीस हजार में तैयार हो जाते हैं।पिछले कुछ सालों से इनकी संख्या में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है।कारण साफ है,बेहद कम समय में यह ग्राहकों का सामान उनकी मंजिल तक पहुंचा देते हैं।हालांकि इनका ज्यादातर इस्तेमाल माल बड़ी सब्जी मंडी से सब्जियों को लादकर छोटी सब्जी मंडी में पहुंचाने के लिए ही होता दिखाई देता है।लेकिन इसके अलावा भी यह अपनी दिहाड़ी चित करने के लिए डग्गामार वाहनों की तर्ज पर सामान ढो देते हैं।समस्या गरीब तबके के लोगों द्वारा रोजी रोटी के लिए नये नये तरीके ईजाद करने को लेकर नही है दिक्कत यह है कि इसके चलते ना सिर्फ जुगाड़ वाहन चला रहे लोग अपनी बल्कि दूसरों की जिंदगी को भी खतरे में डाल रहे हैं।हेरत की बात यह भी है कि सड़कों पर फर्राटा भरने वाले जुगाड़ वाहनों को लेकर ट्रेफिक पुलिसकर्मियों ने भी अपनी आखों पर पट्टी बांध रखी है।

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