नौनिहालों के स्कूल बस्तों के बोझ तले दब रहा है बचपन!

नौनिहालों के स्कूल बस्तों के बोझ तले दब रहा है बचपन!

ऋषिकेश-मंहगी शिक्षा से अभिभावक और बस्तों के बोझ तले मासूम बच्चे दबते चले जा रहे हैं।स्कूल बैग अब बच्चों के शरीर पर बोझ बन गए हैं। कक्षावार पाठ्य सामग्री के सुझावों के बावजूद स्कूलों में बढ़ा चढ़ाकर किताबें लगाई जा रही हैं जिससे बैग का वजन बच्चों की वजन के अनुपात में बढ़ता ही जा रहा है।प्राइमरी शिक्षा ले रहे बच्चे भी समस्या का शिकार हो रहे हैं।


अभिभावक संघर्ष महासंघ के संयोजक रवि जैन का कहना है कि कुछ स्कूलों में कुछ किताबें जबरन बच्चों पर थोपी जा रही हैं जिसकी वजह से स्कूल बैग अब बच्चों के शरीर पर बोझ बन गए हैं। कक्षावार पाठ्य सामग्री के सुझावों के बावजूद स्कूलों में बढ़ा चढ़ाकर किताबें लगाई जा रही हैं जिससे बैग का वजन बच्चों की वजन के अनुपात में बढ़ता ही जा रहा है। जबकि स्कूल बैग का वजन बच्चे की वजन का पांच से 10 प्रतिशत ही होना चाहिए। मैत्री संस्था की अध्यक्ष कुसुम जोशी का कहना है मंहगी शिक्षा अभिभावकों और स्कूल बस्तों के बढ़ते वजन बच्चों की कमरतोड़ रहे हैं।अधिकतर स्कूलों में मनचाहे विषय और अपनी ओर से तय किताबें लगाने का सिलसिला इस सत्र में भी जारी है।

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