दो जिस्मों में दोड़ती एक जान!

दो जिस्मों में दोड़ती एक जान!

दिव्यांग बहन नीरजा की सारथी बनी छुटकी नूपुर

ऋषिकेश-मोजूदा दौर में दो बहनों के बीच अधिकांशतः आपसी प्रतिद्वंदिता ही अधिक देखने को मिलती है लेकिन तीर्थ नगरी में दो बहनें ऐसी भी हैं दो जिस्म एक जान बनकर समाज के लिए मिसाल बनी हुई हैं।


जी हां हम बात कर रहे हैं पैरा ओल्पियन व समाज सेविका नीरजा गोयल व उसकी छोटी बहन नूपुर गोयल की।बेशुमार प्रतिभा की धनी नीरजा अपने विशेष टेलेंट और समाजसेवी सोच के जरिए आज ना सिर्फ तीर्थ नगरी बल्कि पूरे उत्तराखंड में अपनी एक खास पहचान बना चुकी हैं।लेकिन जमीनी सच्चाई यह भी है कि नीरजा की उपलब्धियों में उसके साथ सायें की तरह रहने वाली उसकी छोटी बहन नूपुर की अहम भूमिका रही है।बात उसे मोरल सपोर्ट देने की हो या उसे उसकी मंजिल तक पहुंचाने की नूपुर हमेशा उसके लिए बेक बोन साबित हुई है।यह बात उनके परिवारिक सदस्य तो भलिभांति जानते ही हैं दोनों बहनों को बेहद करीब से समझने वाले भी मानते हैं कि तमाम तरह के संघर्षों को झेलने के बाद नीरजा आज जिस मुकाम पर पहुंची है उसका बड़ा श्रेय नूपुर को ही जाता है। ऋषिकेश के मैन बाजार में बर्तनों की दुकान में अपने भाई के साथ सहयोग करने वाली दोनों बहनें नीरजा फाऊंडेशन ट्रस्ट के माध्यम से निर्धन एवं असहाय लोगों के लिए लगातार मदद कर रही हैं।दोनों बहनों का बेजोड़ प्रेम समाज के लिए भी मिसाल बना हुआ है।

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