विश्व जल संरक्षण दिवस : रोकें पानी का व्यर्थ बहाव

विश्व जल संरक्षण दिवस : रोकें पानी का व्यर्थ बहाव

ऋषिकेश- पानी की कमी के संकट से दुनिया का हर देश जूझ रहा है। लोगों को जल संरक्षण को लेकर जागरूक करने के लिए हर साल वैश्विक जल दिवस मनाया जाता है।लेकिन क्या एक दिन विशेष पर जल.संकट पर विचार गोष्ठियों के आयोजन एवं जागरूकता कार्यकर्मों से समस्या का समाधान हो जायेगा ऐसा फिलहाल तो मुमकिन नही लगता।ऋषिकेश के यूथ की मानें तो जल संरक्षण के लिए गंभीर प्रयासों की जरुरत है।सरकार के साथ इसमें जनसहभागिता सुनिश्चित होनी चाहिए।


विश्व जल संरक्षण दिवस के मौके पर जी आई सी इंटरनेशनल के चैयरमैन डॉ गौरव गोयल का कहना है कि ‘जल ही जीवन है’, ये कहने की बात नहीं बल्कि जीवन के पाँच तत्वों में से एक जल पृथ्वी के सभी जीवों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। आज औद्योगीकरण, अति-उपयोग और सभी प्राकृतिक स्रोतों के दोहन के कारण पाँच तत्वों में से एक जल भी अब कम होता जा रहा है। इसलिए जल संरक्षण और उसके महत्व को ज-जन तक पहुंचाने के लिए जागृत होना बेहद जरूरी है।रोटरी ऋषिकेश सेंट्रल के पूर्व अध्यक्ष हितेंद्र पंवार के अनुसार भू-जल एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है और अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह सिंचाई और खाद्य उद्योग के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। 64% भू-जल का उपयोग फसलों को उगाने के लिए सिंचाई के लिए किया जाता है। दुनिया भर में, 2.5 अरब लोग अपनी रोजाना की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से भू-जल संसाधनों पर ही निर्भर हैं। इससे आप समझ सकते हैं भू-जल कितना महत्वपूर्ण है परंतु इसका स्तर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है जोकि बेहद चिंतनीय है। शहर के प्रतिष्ठित व्यवसाई
निशांत मलिक कहते हैं कि जल ही जीवन है।लेकिन विडम्बना यह भी है कि पृथ्वी से बेहद तेजी के साथ जल की कमी आ रही है।भारत समैत पूरी दुनिया इस चुनौती से जूझ रही है। जल की कमी से आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए अगर तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो वो पानी को लेकर लड़ा जाएगा। इसके पीछे कारण भू-जल का कम होता स्तर है।

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