जल आपूर्ति व संरक्षण को एसआरएचयू के ‘भगीरथ’ प्रयास सदैव रहेगें जारी-डॉ.विजय धस्माना

जल आपूर्ति व संरक्षण को एसआरएचयू के ‘भगीरथ’ प्रयास सदैव रहेंगें जारी-डॉ.विजय धस्माना

एसआरएचयू : सेवा के मंदिर ने समझी जल की हर बूंद की अहमियत

ऋषिकेश- स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जॉलीग्रांट की प्रयोजित संस्था हिमालयन इंस्टिट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी) का जल आपूर्ति व संरक्षण के लिए ‘भगीरथ’ प्रयास जारी है। विश्वविद्यालय के कैंपस में रोजाना 07 लाख लीटर पानी रिसाइकिल कर सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। संस्था द्वारा विश्वविद्यालय से बाहर भी द्वारा देशभर 550 गांवों में स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छता योजनाओं का निर्माण करवाया गया है। साथ ही 7000 हजार लीटर क्षमता के लिए 600 से ज्यादा जल संरक्षण टैंकों का निर्माण एवं 71 ग्रामों में जल संवर्धन का कार्य करवाया गया।



एसआरएचयू के कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने बताया कि विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय कैंपस में जल संरक्षण के लिए अभिनव पहल शुरू की जा रही है। इस नवीन योजना के मुताबिक एक लीटर वाली खाली बोतल को आधा रेत या मिट्टी से भरकर ढक्कन लगा दिया जाएगा। उसके बाद उसे टॉयलेट की सिस्टर्न (फ्लश टंकी) के भीतर बोतल रख दी जाएगी। इससे सिस्टर्न में बोतल के आयतन (एक लीटर) के बराबर पानी कम आएगा। यानी जब भी आप फ्लश चलाएंगे तो एक लीटर पानी की बचत होगी। इससे सिस्टर्न की कार्यकुशलता पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने बताया कि एक टॉयलेट में औसतन प्रतिदिन 15 बार फ्लश इस्तेमाल की जाती है। इस प्रकार प्रतिदिन 15 लीटर पानी की बचत होगी। कैंपस में करीब 2000 शौचालय हैं। इस तरह औसतन रोजाना 30,000 लीटर जबकि साल में औसतन एक करोड़ लीटर पानी बचा पाएंगे। जमीन से एक लीटर पानी को निकालने के लिए करीब 3 रुपये खर्च होते हैं। इस तरह सालाना एक करोड़ लीटर पानी बचाकर हम 3 करोड़ रुपए की बचत भी कर पाएंगे।कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने बताया कि यह अच्छा संकेत है कि पानी की महत्ता को आज कई संस्थान समझ रहे हैं। लेकिन, हमारे संस्थान में 23 वर्ष पहले ही जल आपूर्ति व संरक्षण के लिए एक अलग वाटसन (वाटर एंड सैनिटेशन) विभाग का गठन किया जा चुका है। तब से लेकर अब तक वाटसन की टीम द्वारा उत्तराखंड के सुदूरवर्ती व सैकड़ों गांवों में पेयजल पहुंचाया जा चुका है।कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने बताया कि भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने एचआईएचटी को राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के ‘हर घर जल योजना’ के सेक्टर पार्टनर के तौर पर नामित किया है। यह एक दिन या महीने भर की मेहनत का नतीजा नहीं है, बल्कि सालों से जल संरक्षण के क्षेत्र में एचआईएचटी टीम के द्वारा किए गए बेहतरीन प्रयास की सफलता है। इसके तहत एसआरएचयू के एक्सपर्ट 24 राज्यों के पब्लिक हेल्थ इंजीनियर्स को ट्रेनिंग दे रहे हैं।

*रोजाना 07 लाख लीटर पानी रिसाइकल*
कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने बताया कि एसआरएचयू कैंपस में करीब 1.25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाया गया है। इस प्लांट के माध्यम से 07 लाख लीटर पानी को रोजाना शोधित किया जाता है। शोधित पानी को पुनः कैंपस में सिंचाई व बागवानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भविष्य में इस प्लांट की क्षमता बढ़ाकर इसी शोधित पानी को शौचालय में भी इस्तेमाल को लेकर हम कार्य कर रहे हैं।

वाटर लेस यूरिनल से बचाते हैं सलाना लाखों लीटर पानी

कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने कहा कि जल संरक्षण के लिए हमने एक और कारगर शुरुआत की है। विश्वविद्यालय के सार्वजनिक शौचालयों में अत्याधुनिक तकनीक से निर्मित वाटर लेस यूरिनल लगवाए जा रहे हैं। शुरुआती चरण में अभी तक 100 से ज्यादा वाटर लेस यूरिनल लगाए जा चुके हैं। भविष्य में इस तरह के वाटर लेस यूरिनल कैंपस के सभी सार्वजनिक शौचालयों में लगवाए जाएंगे। स्वच्छता के दृष्टिकोण से भी यह बेहतर है। अमूमन एक यूरिनल से हम प्रतिवर्ष लगभग 1.50 लाख लीटर पानी को बर्बाद होने से बचाते हैं।

12 रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज पिट बनाए गए

कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने बताया कि बरसाती पानी के सरंक्षण के लिए एसआरएचयू कैंपस में वर्तमान में करीब 50 लाख रुपये की लागत से 12 रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज पिट बनाए गए हैं। इन सभी से सलाना करीब 40 करोड़ लीटर बरसाती पानी को रिचार्ज किया जा सकता है। डॉ. धस्माना ने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज पिट के बहुत फायदे हैं। ऐसा करने से बरसाती पानी आसानी से जमीन में चले जाता है, जिस कारण जमीन में पानी का स्तर बना रहता है।

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