गौरैया के संरक्षण के लिए करूणामयी हद्वय आवश्यक-कुसुम जोशी

गौरैया के संरक्षण के लिए करूणामयी हद्वय आवश्यक-कुसुम जोशी

ऋषिकेश-विश्वभर में आज गौरैया दिवस मनाया जा रहा है पर प्रश्न यह है कि इस दिन को मनाने की आवश्यकता आन क्यों पड़ी? कुछ यही सवाल उठाया है पर्यावरण एवं पशु-पक्षी प्रेमी मैत्री संस्था की अध्यक्ष कुसुम जोशी का।



रविवार को विश्व गोरैया दिवस के मौके पर समाजसेविका कुसुम जोशी ने कहा कि आज गौरैया सिर्फ पुस्तकों, कविताओं में ही है। गांव में यदि कभी कोई गौरैया दिख जाए तो बच्चे झूम उठते हैं लेकिन समस्त मानव समाज के लिए शर्म की बात है कि गौरैया अब विलुप्ति की कगार पर है इसका संरक्षण हमारा परम कर्तव्य होना चाहिए लेकिन विडंबना यह है कि इसको लेकर कोई चिंतित ही नही है।उन्होंने बताया की ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी ऑफ बर्डस द्वारा विश्व के विभिन्न देशों में किए गए अनुसंधान के आधार पर भारत और कई बड़े देशों में गौरैया को रेड लिस्ट कर दिया गया है जिसका अर्थ है कि यह पक्षी अब पूर्ण रूप से विलुप्ति की कगार पर है।मैत्री अध्यक्ष कुसुम जोशी के अनुसार गौरैया संरक्षण के अपनी छत पर दाना-पानी रखें, अधिक से अधिक पेड़- पौधे लगाएं, उनके लिए कृत्रिम घोंसलों का निर्माण करें। ऐसा करने पर ही गोरैया को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है।

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