पार्षद बोले सरसों के तेल की कालाबाजारी करने वालों पर नकैल कसे प्रशासन

पार्षद बोले सरसों के तेल की कालाबाजारी करने वालों पर नकैल कसे प्रशासन

रूस-यूक्रेन युद्व के चलते सरसों के तेल की कालाबाजारी शुरू,आसमान पर पहुंचे दाम

यूक्रेन संकट बहाना, मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ा खाद्य तेल

ऋषिकेश-दो हफ्ते की जंग में सरसों के तेल का भाव एक बार फिर आसमान पहुंच गया है। इस बार यह भाव रूस यूक्रेन युद्ध की आड़ में कालाबाजारियों ने बढ़ाया है। सरसों व रिफाइंड तेल की कीमतों में बीते बीस दिन के भीतर तीस से पैंतीस रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाेत्तरी हुई है।दुनियाभर की निगाहें रूस -यूक्रेन युद्व पर लगी है।


।इस बीच महगाई ने एक बार फिर से कमरतोड़ दी है।खासतौर पर सरसों तेल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। ऋषिकेश में पंद्रह से बीस दिन पहले तक 140 रुपये प्रति लीटर वाला रिफाइंड अब 170-175 रुपये के भाव बिक रहा है।बताया जा रहा है कि बाजार में तेल के पर्याप्त स्टाक के बाद भी फुटकर व्यापारियों को माल नहीं मिल रहा है। या फिर मिल भी रहा है तो उसके बदले मनमानी कीमत वसूली जा रही है।बाजार से जुड़े जानकारों के अनुसार रुस व यूक्रेन सनफ्लावर, सोया व पाम आयल के बड़े निर्यातक देश हैं युद्ध शुरू अभी महज दो सप्ताह हुए हैं। कारोबारियों के अनुसार तेल कंपनियों के पास तीन महीने का तक का स्टाक रहता है। ऐसे में तेल के भाव आसमान छूने का कारण कालाबाजारी व मुनाफाखोरी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते आगामी दिनों में कारोबार पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए कालाबाजारी सक्रिय हो गए हैं। आयात बंद दिखाकर मुनाफाखोरों ने सनफ्लावर और पाम आयल के दाम बढ़ा दिए हैं।पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट का कहना है कि सरसों के तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, इसका प्रमुख कहीं न कहीं जमाखोरी भी है ।स्थानीय स्तर फर जमाखोरी के कारण तेल के भाव आसमान छू रहे हैं। इसको लेकर प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।शासन द्वारा नामित पार्षद प्रदीप कोहली की माने तो बड़े कारोबारियों की जमाखोरी व मुनाफाखोरी की आंच भी सरसों के तेल के दाम बढ़ने की बड़ी वजह है।इसी के चलते लगातार भाव आसमान छू रहे हैं। शासन-प्रशासन को इसमें रुचि लेकर आमजन के हित में जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।

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