मानव के संपूर्ण विकास के लिए आत्मिक विकास नितांत आवश्यक-स्वामी

मानव के संपूर्ण विकास के लिए आत्मिक विकास नितांत आवश्यक-स्वामी

ऋषिकेश- परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें याद करते हुए विदेश से भेजे अपने संदेश कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक श्रेष्ठ चिन्तक और संगठनकर्ता थे जिन्होंने भारत की सनातन संस्कृति को वर्तमान परिपेक्ष्य के अनुसार प्रस्तुत कर ‘एकात्म मानववाद’ विचारधारा से सभी को अवगत कराया। उन्होंने भारत को सशक्त, समृद्ध और विकसित करने के लिये हमेशा समावेशित विचारधारा का समर्थन किया।



स्वामी चिदानंद ने कहा की दीनदयाल उपाध्याय एक दार्शनिक, समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री एवं कुशल राजनीतिज्ञ थे। उनका दर्शन एकात्म मानववाद’ जिसका उद्देश्य एक ऐसा स्वदेशी सामाजिक-आर्थिक मॉडल प्रस्तुत करना था जिसके विकास में मानव हो। उनके अनुसार पूंजीवादी एवं समाजवादी विचारधाराएँ केवल मानव के शरीर एवं मन की आवश्यकताओं पर विचार करती है इसलिए वे भौतिकवादी.उद्देश्य पर आधारित हैं जबकि मानव के संपूर्ण विकास के लिए आत्मिक विकास भी आवश्यक है।

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