नदियों के लिये सहयोगी और सहभागी दृष्टिकोण आवश्यक-स्वामी चिदानन्द

नदियों के लिये सहयोगी और सहभागी दृष्टिकोण आवश्यक-स्वामी चिदानन्द

ऋषिकेश- परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने माँ नर्मदा जयंती के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनायें देते हुये कहा कि आज के ही दिन धरती पर मां नर्मदा का अवतरण हुआ था। हिन्दू संस्कृति में नदियों का बहुत अधिक महत्व है। सनातन संस्कृति में हमारी नदियों को मां का दर्जा दिया गया है। मान्यता के अनुसार जितना पुण्य पूर्णिमा तिथि को पवित्र नदियों में स्नान से प्राप्त होता है। वैसा ही पुण्य नर्मदा जयंती पर नर्मदा नदी में स्नान करने पर मिलता है।


स्वामी चिदानंद ने अपने संदेश में कहा कि हिंदू धर्म में न सिर्फ देवी-देवताओं की भक्ति भाव से पूजा-उपासना करने की परंपरा है, बल्कि पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और नदियों की भी पूजा होती है। हिंदू धर्म में नदियों को अत्यंत पूज्यनीय माना गया हैऔर माँ नर्मदा का तो उद्गम ही अमरकंटक से हुआ है इसलिये उनका अत्यंत आध्यात्मिक महत्व है।उन्होंने बताया शास्त्रों में उल्लेख है कि भगवान शिव ने धरती पर रहने वालों के पाप धोने के लिए माँ नर्मदा को उत्पन्न किया था।नर्मदा के पवित्र जल में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते है।

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