अध्यात्मिकता विकास की नीव-स्वामी चिदानन्द

अध्यात्मिकता विकास की नीव-स्वामी चिदानन्द

ऋषिकेश- परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डिवाइन शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष साध्वी भगवती सरस्वती ने इलनेस टू वेलनेस आध्यात्मिकता के माध्यम से शरीर और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिये आनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से सम्बोधित किया।


स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि एक विकासवादी, स्वस्थ, समुन्नत और समृद्ध जीवन व भविष्य के निर्माण के लिये विज्ञान और आध्यात्मिकता का संयुक्त स्वरूप व दोनों का समन्वय बहुत जरूरी है।आध्यात्मिकता, विज्ञान की वह नींव है जिस पर विकास का मजबूत भवन खड़ा किया जा सकता है। नींव मजबूत होगी तो भवन स्थायी और सुदृढ़ होगा क्योंकि अध्यात्म और विज्ञान एक ही सिक्के के दो पहलू है इसलिये दोनों को साथ लेकर चलना होगा, दोनों में से एक भी कमजोर होगा तो स्वस्थ, सतत विकास और स्वस्थ समुन्नत जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती हैं।साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि वेलनेस से तात्पर्य केवल शरीर से नहीं है बल्कि मस्तिष्क और आत्मा से भी है और स्वस्थ रहने की शक्ति हम सभी के पास है। स्वस्थ और खुश रहने के लिये परिस्थितियां नहीं बल्कि हमारी सोच; हमारे विचार जिम्मेदार है।

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