पदम विभूषण बिरजू महाराज का त्रिवेणी घाट पर हुआ दसवां, महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य परिजनों सहित रहे मोजूद

पदम विभूषण बिरजू महाराज का त्रिवेणी घाट पर हुआ दसवां, महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य परिजनों सहित रहे मोजूद

ऋषिकेश- बिरजू महाराज के निधन के बाद दसवां की रस्म के लिए उनके परिजनोंं ने उनकी इच्छा अनुसार ऋषिकेश त्रिवेणी घाट पर विधिवत रूप से सम्पन्न की।


ज्ञात रहे की बिरजू महाराज का श्री भरत मंदिर और गंगा मां से बहुत लगाव था ।उनकी इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनके दसवां की रस्म मां गंगा के तट पर की जाए ।परिजनों के अनुसार बिरजू महाराज का हृषिकेश नारायण श्री भरत भगवान से बहुत लगाव था और वह कई बार दर्शनों के लिए आए और अपने अंतिम समय में लगातार परिजनों से श्री भरत मंदिर में प्रभु नारायण के दर्शनों की इच्छा व्यक्त करते रहते थे।उनकी इच्छा अनुसार ही परिजनों ने दसवां की रस्म निभाई।श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपनाचार्य महाराज ने कहा कि पंडित बृजमोहन नाथ मिश्रा को ही बिरजू महाराज के नाम से जाना जाता था जो कत्थक नृत्य में पदम विभूषण से सम्मानित थे। 4 फरवरी 1937 को जन्मे बिरजू महाराज की मृत्यु 7 जनवरी 2022 को 83 वर्ष की उम्र में हुई। इनके कत्थक नृत्य की शिक्षा दीक्षा इनके पिता और गुरु अच्छन महाराज की देख में ही पूरी हुई। ये दिल्ली के भारतीय कला केंद्र के कथक केंद्र में शिक्षक और निदेशक के रूप में भी सेवाएं देते हए 1998 में सेवानिवृत्त हुये थे। दसवां की रस्म में परिजन दामाद साजन मिश्रा गायक , पुत्र पंडित जय किशन महाराज ,दीपक महाराज ,पोते त्रिभुवन महाराज और स्वरांश मिश्रा आदि उपस्थित थे।

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