देवभूमि ऋषिकेश में जाड़े के सर्द मौसम में घुल रहें हैं फाल्गुनी मस्ती के रंग!

देवभूमि ऋषिकेश में जाड़े के सर्द मौसम में घुल रहें हैं फाल्गुनी मस्ती के रंग!

ऋषिकेश-जाड़े के सर्द मौसम में फाल्गुनी मस्ती के रंग देवभूमि ऋषिकेश की फिजाओं में घुलने शुरु हो गये हैं।चौकिएगा नही ,हम बात कर रहे हैं बैठकी होली की जोकि अब कुमाऊं की वादियों तक ही सीमित नही है बल्कि इसकी सुरीली महक गढवाल में भी महसूस की जाने लगी है।



गढवाल के मुख्य द्वार ऋषिकेश में भी बैठकी होली शुरू हो चुकी है।सुनने में बड़ा अटपटा है क्योंकि देश और दुनिया के लिये अभी होली आने में पूरे तीन महीने बाकी हैं। लेकिन आवास विकास क्षेत्र में बकायदा इसके लिए कलाकारों की चौकड़ी जमने लगी है।सायंकाल में होने वाली यह होली अब निरंतर छलड़ी तक चलेगी।हर शाम को कार्यक्रम के लिए होने वाले रियाज से पूर्व गुड़ की भेली तोड़कर सभी उपस्थित कलाकारों व श्रोताओं के बीच बांटी जाती है। बैठकी होली के बारे में जानकारी देते हुए मैत्री समाजसेवी संस्था की अध्यक्ष कुसुम जोशी ने बताया कि पहले समाज में आज के जैसे संचार के साधन नही थे। उस दौर में तब मनोरंजन के नाम पर होली की बैठक ( साथ बैठ कर अपना मनोरंजन )स्वयं किया जाता था। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में यह परंपरा लंबे समय से चल रही है।देवभूमि उत्तराखंड प्रदेश के कुमाऊं अंचल में रामलीलाओं की तरह राग व फाग का त्योहार होली भी अलग विधा के साथ मनाया जाता है।उन्होंने बताया कि महान उत्तराखंडी संस्कृति की पौराणिक परम्पराओं को कायम रखने के लिए मैत्री संस्था कटिबद्ध है।उन्होंने बैठकी होली में सूरों का तराना लगाकर सहयोग कर रहे प्रेम सिह नेगी , गोरव जवाडी ,प्रमिला जोशी ,नंदनी जोशी, शुभम जोशी ,सीता पयाल का आभार भी जताया।

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