पहाड़ों में बादलों ने चीरा सीना जलमग्न हुआ त्रिवेणी घाट

पहाड़ों में बादलों ने चीरा सीना जलमग्न हुआ त्रिवेणी घाट

अक्टूबर माह में पहली रोद्र रूप में दिखाई दी गंगा

प्रशासन ने सक्रियता से रातो रात खाली कराए घाट

ऋषिकेश- पहाड़ों में बादलों के सीना चीर लेने से ऋषिकेश में गंगा उफान पर आ गई है।नगर की हद्वय स्थली त्रिवेणी घाट मंगलवार को पूरी तरह से जलमग्न रहा। ऋषिकेश में गंगा का चल स्तर चेतावनी बिन्दु से ऊपर पहुंच गया है। अक्टूबर माह में पहली बार बाड़ जैसा जैसा खतरनाक स्वरुप गंगा ने दिखाया है। सुबह गंगा दर्शन के लिए पहुंचे लोग उस वक्त हेरत में पड़ गये जब उन्होंने त्रिवेणी घाट को पूरी तरह से जलमग्न पाया।


मंगलवार को गढ़वाल के मुख्य द्वार ऋषिकेश में गंगा का रौद्र रूप में दिखाई दे रही है। पिछले तीन दिनों से पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। जिसके बाद सोमवार की रात गंगा के जलस्तर में भी तेजी से वृद्धि हुई। घाट पर आरती स्थल भी पूरी तरह से जलमग्न हो गया है।गंगा का जलस्तर बढ़ने से ऋषिकेश, मुनिकी रेती, परमार्थ निकेतन, स्वर्गाश्रम व लक्ष्मणझूला क्षेत्र के सभी पक्के घाट जलमग्न होने शुरू गये हैं। ऋषिकेश के प्रमुख त्रिवेणी घाट का आरती स्थल भी पानी में डूब गया है। कई घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर हैं। बरसाती नालों में भी पानी बढ़ गया है।प्रशासन द्वारा पहले ही अलर्ट जारी कर दिया गया था।पहाड़ों और मैदानी भागों में हो रही लगातार बारिश के कारण योगनगरी में गंगा का जलस्तर बढ़ गया। गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगी।
गंगा नदी में सिल्ट और लकड़ी की डाट बहकर आने से पशुलोक बैराज के सभी 15 गेट खोल दिए गए हैं। वहीं चीला शक्ति नहर में पानी न जाने से उत्पादन ठप हो गया है। यूजेवीएनएल (उत्तराखंड जल विद्युत निगम) की ओर से हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट सहित परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम, और लक्ष्मण झूला के लगभग सभी गंगा घाट डूब गए हैं। मायाकुण्ड, चंद्रेश्वर नगर में पानी भर गया है। परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम का कथा स्थल भी जलमग्न हो गया है।तपोवन नगर और मुनिकीरेती में आश्रमों और होटलों को अलर्ट जारी किया गया है। टिहरी, पौड़ी और ऋषिकेश प्रशासन लगातार मुनादी करवा रहा है।

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