विजयदशमी पर्व पर स्वयं के अहंकार को खत्म करने का ले संकल्प-रीना नारायण

विजयदशमी पर्व पर स्वयं के अहंकार को खत्म करने का ले संकल्प-रीना नारायण

ऋषिकेश-दशानन की तरह समाज में विद्रूपता के अनेक चेहरे सामने आए। विडबंना ये रही कि हम अपने अंदर के अहंकार व बुराई रूपी रावण को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाए हैं।यह कहना है समाजसेविका रीना नारायण का।


विजयदशमी पर्व की पूर्व संध्या पर उन्होंने कहा कि
आज हर तरफ फैले भ्रष्टाचार और अन्याय रूपी अंधकार को देखकर मन में हमेशा उस उजाले की चाह रहती है जो इस अंधकार को मिटाए। कहीं से भी कोई आस ना मिलने के बाद हमें हमारी संस्कृति के ही कुछ पन्नों से आगे बढ़ने की उम्मीद मिलती है।हम सबने रामायण को किसी ना किसी रुप में सुना, देखा और पढ़ा है। रामायण हमें यह सीख देती है कि चाहे असत्य और बुरी ताकतें कितनी भी ज्यादा हो जाएं पर अच्छाई के सामने उनका वजूद एक ना एक दिन मिट ही जाता है।अंधकार के इस मार से मानव ही नहीं भगवान भी पीड़ित हो चुके हैं ।लेकिन सच और अच्छाई ने हमेशा सही व्यक्ति का साथ दिया है।उन्होंने कहा कि आम जनता को मूलभूत समस्याएं ही निगले जा रही हैं। नवरात्र के दिनों ही देवी स्वरूप नारी पर उत्पीडऩ व अत्याचार की घटनाएं सामने आईं हैं। दशानन की तरह समाज में विद्रूपता के अनेक चेहरे सामने आए। विडबंना ये रही कि हम अपने अंदर के अहंकार व बुराई रूपी रावण को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाए। हकीकत में विजयादशमी का संदेश निरर्थक साबित हो रहा है। आखिर कब मरेगा नई-नई सूरत में जन्म ले रहा रावण? इसके लिए हम सबको आत्ममंथन की जरूरत है।

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