कात्यायनी मंदिर में ज्योति शर्मा के भजनों पर झूमे श्रद्धालु!

कात्यायनी मंदिर में ज्योति शर्मा के भजनों पर झूमे श्रद्धालु!

ऋषिकेश-शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन शहर में मां के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा की गई।तमाम देवी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। वहीं वैदिक मंत्रोंच्चारण से नगर क्षेत्र गुंजायमान हो रहा है। देवी पर्व का उत्साह देवभूमि में हर ओर दिख रहा है। शहर स्थित मंदिरों में सजावट से मनभावन दृश्य देखने को मिल रहा है। वहीं जगह जगह माता के भक्ति गीत बजने से भक्तिमय माहौल है।



शुक्रवार को शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने दुर्गा के अवतार मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की। दूसरे दिन भी सुबह से देवी के मंदिरों में पूजा पाठ शुरू हो गया था। घर-घर में भी पूजा पाठ किया गया। मंदिरों में चल रहे शतचंडी यज्ञों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुति डाली। शहर और आसपास के पौराणिक मंदिरों में दिनभर श्रद्वालुओं ने मां के चरणों में हाजरी लगाई।
नौ दिनों के नवरात्रों में प्रतिदिन भगवती के एक स्वरूप की पूजा की जाती है। सभी नौ रूपों के अलग-अलग मंत्र हैं और पूजा पद्धति भी अलग है। मां ब्रह्मचारिणी सृष्टि की देवी है। उन्होंने ही इस जग की स्थापना की थी। फलस्वरूप यह संसार बसा और धरती पर जीवन आया। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से ही यह स्थूल संसार आगे बढ़ा। आज कात्यायनी मंदिर मे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ,जिसमें श्रद्वालुओं ने सहभागिता कर मां की अराधना की।शीशम झाड़ी स्थित कात्यायनी मंदिर में श्रद्वालुओं का तांता दिनभर लगा रहा।मंदिर के संस्थापक गुरुविंदर सलूजा द्वारा मां की विशेष आरती की गई।इससे पूर्व वृहस्पतिवार की शांम मंदिर में आयोजित भजन संध्या में शहर के विख्यात भजन गायक पंडित ज्योति शर्मा ने मां की भेंटों की अविरल गंगा बहाकर श्रद्वालुओं को मां वैष्णवी के ध्यान में झूमने पर विवश कर दिया।क्षेत्र की महिला मंडली द्वारा प्रस्तूत किए गये भजनों ने भी भजन संध्या में चार चांद लगा दिए।मंदिर के संस्थापक गुरूविंदर सलूजा व उनकी धर्मपत्नी नमिता सलूजा ने भजन मंडली को मां की चुनरी ओढाकर उन्हें सम्मानित किया।इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्वालु मोजूद रहे।

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