व्यवस्था लाचार, चालक बेपरवाह, कौन थामेगा हादसे!

व्यवस्था लाचार, चालक बेपरवाह, कौन थामेगा हादसे!

ऋषिकेश-तीर्थ नगरी ऋषिकेश की सड़कें प्रत्येक दिन लाल हो रही। सड़क दुर्घटना के आगे व्यवस्था लाचार है वहीं वाहन चालक भी बेपरवाह हैंं। उन्हें तो बस जल्दी पहुंचने की चिंता रहती है। लोगों की जान के प्रति वे बेपरवाह रहते हैं। अधिसंख्य चालक तो तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के आदी हैं। उनके अंदर दुघर्टना के बाद कमजोर कानून का भय तनिक भी नहीं है। लिहाजा चालकों की लापरवाही प्रत्येक दिन घायलों को अस्पताल का रास्ता नपवा रही है। जख्मी होने वाले का तो आकड़ा भी मुश्किल है। शहर में कम उम्र के बच्चे बाइक और स्कूटी पर फर्राटे भरते हैं। जिस पर रोक लगाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो रहा है। सड़क पर चलने के लिए ट्रैफिक के नियम बने हैं। लोगों को स्कूली स्तर से ही सड़क पर चलने के बारे में बताया जाता है। वाहन चलाने के लिए लाईसेंस लेने पड़ते हैं इसके लिए निर्धारित योग्यता की जांच होती है। छह महीने के लिए लर्निंग लाईसेंस निर्गत किया जाता फिर ड्डाईविंग लाईसेंस दिया जाता फिर निर्धारित समय पर इसका रिन्यूअल कराना होता। इन तमाम चीजों के बाद भी तीर्थ नगरी में सड़क दुर्घटना का सिलसिला कम नहीं रहा है। सड़क पर तेज रफ्तार की भेंट जिंदगी चढ़ रही है।


शिक्षाविद डॉ सुनील दत्त थपलियाल का कहना है कि सड़क दुर्घटना का सबसे प्रमुख कारण वाहनों का अनियंत्रित एवं तेजी गति से चलना है। चालक नशे की हालत में भी वाहन चलाते हैं। बाइक सवार हेलमेट का उपयोग न के बराबर करते हैं। युवा वर्ग में बाइकर्स बनने की होड़ लगी है। भीड़ वाले क्षेत्र तथा एक्सीटेंड के डेंजर जाने में भी वाहनों की गति सीमा का निर्धारण नहीं किया गया है। अधिवक्ता अमित वत्स के अनुसार दुर्घटना को लेकर बने कानून की धारा में कम सजा तथा जमानत का प्रावधान होने के कारण चालक के मन में कानून का भय कम है। ऐसे मामलों में अक्सर वाहन चालक को गिरफ्तारी और पुलिस जांच के बाद जमानत मिल जाती है।पार्षद राजेेन्द्र बिष्ट का कहना है कि सड़क पर चलते वक्त आसान विकल्प अपनाना खतरनाक हो सकता है। सड़क पार करते वक्त रुके, सुने, देखें व सोच समझकर पार करें। सड़क के खतरों से सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होते हैं। उनका विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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