भगवान श्री कृष्ण ने सिखाया कर्म योग का ज्ञान-भरत किशोर महाराज

भगवान श्री कृष्ण ने सिखाया कर्म योग का ज्ञान-भरत किशोर महाराज

ऋषिकेश-आर्दश ग्राम में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तहत सोमवार को पांचवे दिन श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। कथा का श्रवण करने से श्रद्वालुओं की जबरदस्त भीड़ आज उमड़ी और कथा का रसपान किया।


शहर के नामचीन स्वर्ण आभूषण व्यवसाई भरत सिंह पंवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में संगीतमयी कथा प्रवचन करते हुए व्यासपीठ से पूज्य भरत किशोर महाराज ने बताया कि कृष्ण हिन्दू धर्म में विष्णु के अवतार हैं। सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्वपापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं।जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। वैसे तो भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया। इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैं। श्रीकृष्ण जी के जीवन गाथा का विस्तारपूर्वक विवरण करते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेते ही कर्म का चयन किया। नन्हें कृष्ण ने जन्म के छठे दिन ही शकटासुर का वध कर दिया, सातवें दिन पूतना को मौत की नींद सुला दिया। तीन महीने के थे तो कान्हा ने व्योमासुर को मार गिराया।प्रभु ने बाल्यकाल में ही कालिया वध किया और सात वर्ष की आयु में गोवर्धन पर्वत को उठाकर इंद्र के अभिमान को चूर-चूर किया। गोकुल में गोचरण किया तथा गीता का उपदेश देकर हमें कर्मयोग का ज्ञान सिखाया। प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए। कथा के समापन पर मुख्य यजमान भरत सिंह पंवार,संजय पंवार,अजय पंवार ने छप्पन भोग का महाप्रसाद वितरित कराया।

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