हरिद्वार रोड पर जमीनोदंज हुआ सौ वर्ष पुराना पीपल!

हरिद्वार रोड पर जमीनोदंज हुआ सौ वर्ष पुराना पीपल!

ऋषिकेश-कहते है किसी भी शहर का विकास तभी संम्भव हो सकता है, जब वहां की यातायात व्यवस्था चुस्त दुरुस्त हो। ऐसा ही कुछ इन दिनों अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ऋषिकेश में देखने को मिल रहा है, जहां विकास के नाम पर शहर के प्रमुख हरिद्वार मार्ग पर फोरलेन के निर्माण के लिए सड़क के किनारे खड़े दशकों पुराने हरे पेड़ों की कटाई जोरों पर हो रही है, जिससे पर्यावरण संकट का खतरा उत्पन्न हो गया है।गौरतलब है कि कल इस पेड़ को काटने के विरोध में एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी ने घंटो तक गल्ले में रस्सी बांधकर हंगामा मचाया था।बड़ी मुश्किल से तीन दिन तक पेड़ की सिर्फ लोपिंग करने के आश्ववासन पर एन एच अधिकारी उस बुजुर्ग को समझाने में कामयाब हो पाये थे।इन सबके बीच आज सुबह से ही पेड़ की बड़ी बड़ी टहनियों को जमीनोदंज किए जाने की कारवाई शुरू हो गई थी।जोकि दिनभर चलती रही।



उल्लेखनीय है कि एक जनहित याचिका के बाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद पहले कुछ मंदिर ध्वस्त हुए और फिर अतिक्रमण पर कारवाई। अब लंबे इंतजार के बाद बारी पेड़ों के कटान की है।बता दें कि ऋषिकेश -बद्रीनाथ मार्ग पर कोयल घाटी से चन्द्रभागा पुल तक दो चरणों में फोरलेन का निर्माण होना है।खास बात यह है कि पीडब्ल्यूडी द्वारा कोयलघाटी से लेकर चंद्रभागा तक करीब 2 किलोमीटर के पैच के लिए करीब साढे 14 करोड़ रुपए का प्रस्ताव फोरलेन निर्माण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय को भेज गया था जिसकी स्वीकृति एवं धन निर्गत होने के बाद अब कार्य तेजी से होता हुआ नजर आ रहा है।इन सबके बीच पांच दिन के भीतर आज हरिद्वार रोड़ पर सौ वर्ष से अधिक आयू का पीपल का पेड़ आज जमीनोदंज होकर विकास की भेंट चड़ गया,जबकि अभी इसी मार्ग पर सत्रह हरे पेड़ों पर आरियां चलनी बाकी हैं।ऐसे में पर्यावरण को लेकर आम जनमानस चिंतित है।पर्यावरण विद् विनोद जुगलान की मानें तो तीर्थ नगरी तेजी से कंक्रीट के शहर के रूप में तब्दील हो रह है।वर्षो पुराने पेड़ अपने अस्तित्व को बचाने के लिए छटपटा रहे हैंं।उन्होंनेे कहा कि जिन पेड़ों का कटाान हो रहा है उन कटे
एक एक पेड़ के बदले तुरंत दस दस पौधौं को तुरंत रोपित कर देना होगा अन्यथा आने वाले समय में शहरवासियों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जायेगा।

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