गरीब की थाली से दूर होती जा रही है दाल की कटोरी!

गरीब की थाली से दूर होती जा रही है दाल की कटोरी!

ऋषिकेश- दाल रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ गीत भी महगाई के इस सबसे बुरे दौर में बेमानी हो चला है।कारण है ,दालों के आसमान छूते दाम।



दालें आम उपभोक्ताओं की पहुंच से दूर हो रही हैं। महंगाई का यही आलम रहा तो सिर्फ अमीर की थाली में ही दाल की कटोरी दिखेगी। गरीबजन इससे वंचित रह जाएंगे। विभिन्न तरह की दालों के भाव में 15 से 20 फीसद तक की बढ़ोतरी हो गई है। हालांकि कारोबारियों का कहना है कि कोविड महामारी के दौरान दालों में जो मंदी आई थी, हालात सामान्य होने पर मांग बढ़ने से दालें फिर अपने पुराने रेट पर आ गई हैं। इस महंगाई के पीछे विभिन्न कारण बताए जा रहे हैं। शहर के थोक व्यापारियों का कहना है कि अरहर, उड़द और मूंग के उत्पादन वाले क्षेत्रों में कही सूखा रहा तो कहीं अधिक वर्षा हो गई। ये दोनों स्थितियां पैदावार घटाने में सहायक बनी। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि नवंबर में नई फसल आने और साथ ही दालों का आयात होने जा रहा है। इसके बाद दामों में कमी आना निश्चित है। फुटकर दुकानदारों का कहना है कि दालों की कीमतें बढ़ने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। लागत बढ़ गई लेकिन बिक्री में कमी आने से मुनाफा लगातार घट रहा है। इन सबके बीच चाहे कारण जो भी हो मगर पिसना तो गरीब जनता को ही पड़ रहा है।रसोई गैस और रिफाइंड के साथ दालों के दामों में भी आये उछाल से लोगों के लिए रसोई मे दालों के टोट्टे की आशंकाएं भी उत्पन्न होनी शुरू हो गई हैं।

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