शान्ति भारत का हथियार और एकता भारत की ताकत-स्वामी चिदानंद

शान्ति भारत का हथियार और एकता भारत की ताकत-स्वामी चिदानंद

ऋषिकेश-कारगिल विजय दिवस भारत के गौरवमय इतिहास, सेना के जवानों के शौर्य और वीरता की गाथा कहता है, जो 26 जुलाई, 1999 को लिखी गयी थी। यह भारत का अमर और अमिट इतिहास है। ऑपरेशन विजय जवानों ने अपने खून से लिखी अमिट इबारत है, जिसे हमेशा याद किया जायेगा।उक्त विचार स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने सभी शहीद जवानों के अदम्य साहस एवं बलिदान को नमन करते हुये कारगिल विजय दिवस पर व्यक्त किए।


आज श्रावण माह के प्रथम सोमवार भगवान शिव का अभिषेक करते हुए स्वामी चिदानंद ने कहा कि यह माह प्रकृति का सौंदर्य, आध्यात्मिक ऊर्जा के संचार और आत्मिक शक्ति के विस्तार का है। श्रावण मास में साधक साधना के माध्यम से अपने अंतर्मन के नाद सुन सकते है, हृदय में भी सत्विकता से श्रद्धा का जन्म होता है। आज जरूरत है श्रद्धा से समर्पण की ओर बढ़ने की, आध्यात्मिकता से आत्मीयता की ओर बढ़ने की तथा शिव साधना के साथ शिवत्व को धारण करने की।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि भारत ने जब-जब भी क्रान्ति की वह केवल शान्ति की स्थापना के लिये की ।परन्तु भारत अपनी संप्रभुता तथा अखंडता से कोई समझौता नहीं करता। हम भारतीय शान्ति और एकता की शक्ति के साथ जीते हैं। शान्ति हमारा हथियार है और एकता की शक्ति हमारी ताकत है। युद्ध तो मानवता के विनाश का उत्तरदाई होता है इसलिये मैत्री और शान्ति का मार्ग ही सबसे श्रेयष्कर है। भारत पीसेस नहीं बल्कि पीस पर विश्वास करता है।

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