ऋषि-मुनियों की तपस्थली में गुरु पूर्णिमा पर्व पर धार्मिक अनुष्ठानों की रही धूम

ऋषि-मुनियों की तपस्थली में गुरु पूर्णिमा पर्व पर धार्मिक अनुष्ठानों की रही धूम

पूर्णिमा पर्व बेहद श्रद्वा और उल्लास के साथ मनाया गया।



शनिवार को सुबह 10 बजे के बाद से गुरु का पूजन शुरू हो गया। देवभूमि ऋषिकेश के विभिन्न मंदिरों एवं आश्रमों में धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भजन-कीर्तन हुए जिनमें सम्मलित होकर भक्तों ने गुरु का आशीर्वाद लिया। गंगा तट स्थित जयराम आश्रम में परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी महाराज से आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ पड़ी। उनका आदर-भाव के साथ पूजन किय। गुरु पूजन उत्सव में ऐसा लगा कि मानों आनंद की बारिश हो रही है। गुरु पूर्णिमा पर्व के मौके पर अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में गुरु का स्थान सबसे ऊंचा माना गया है। भगवान का रास्ता बताने वाले गुरु हैं। गुरु मंत्र से ही प्रभु का मार्ग प्रशस्त होता है। गुरु जीवन के उद्देश्यपूर्ण कर देते हैं। इसलिए सनातनी हैं तो गुरु जरूर बनाएं। मगर, जांच-परखकर। ऐसा गुरु जिसका जीवन त्यागमयी हो, जिन्होंने अपने जीवन को धर्म और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया हाे। पल-पल राष्ट्र रक्षा के लिए संकल्पित हो, उसे गुरु बनाना चाहिए। इस अवसर पर पूर्व पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा, जयेंद्र रमोला, प्रदीप शर्मा, चन्द्रशेखर शर्मा, मनमोहन सूदन,ज्योति प्रकाश शर्मा, सुनील प्रभाकर आदि प्रमुख रूप से मोजूद रहे।उधर प्राचीन मायाकुंड स्थित सिद्वपीठ हनुमान मंदिर,गीता आश्रम,परमार्थ निकेतन सहित विभिन्न आश्रमों में भी गुरुपूर्णिमा का पर्व श्रद्वापूर्वक मनाया गया।

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