मोबाइल क्रांति युगः दुनिया मुठ्ठी में अपने हुए दूर!

मोबाइल क्रांति युगः दुनिया मुठ्ठी में अपने हुए दूर!

ऋषिकेश-सोशल नेटवर्किंग के मौजूदा दौर ने रिश्तों की गर्माहट को खत्म करके रख दिया है।मोबाइल क्रांति के युग में दुनिया तो मुठ्ठी में जरूर आई है लेकिन अपने दूर हो चले हैं।खासतौर पर हाथ में मोबाइल, कान में ईयरफोन, तेज संगीत की धुन पर थिरकते पैर, देर रात की पार्टियों को एक टशन मानती आज की युवा पीढ़ी, आधुनिकता और तकनीक दोनों की जकड़ में फंस चुकी है। जानकर बताते हैं फेसबुक, वाट्स ऐप्प, इंस्टाग्राम और ऐसी ही कई सोशल नेटवर्किंग साइटों की गुलाम बनती युवा पीढ़ी की जीवन-शैली और सोच में व्यापक रूप से बदलाव आ गया है। हर हाथ में तेजी से पहुंच रहे स्मार्टफोन और लगभग मुफ्त इंटरनेट सेवाओं ने जीवन-शैली में बदलाव की इस प्रक्रिया में तेजी ला दी है। अब युवा सुबह उठते ही अपने स्मार्टफोन पर सोशल साइटों को चेक करने को तरजीह देते हैं।इन दिनों युवा अपने मोबाइल फोन और सोशल मीडिया में इतने तल्लीन रहते हैं कि वे यह भूल गए हैं कि इसके बाहर भी एक जीवन है।शहर के शिक्षाविदों का मानना है कि आज का युवा स्वयं की छवि को लेकर बहुत चिंतित है, इसलिए सोशल मीडिया के माध्यम से वह उस चीज के बारे में दिखाना और बताना चाहता है, जो उसके पास है।


श्री भारत मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य गोविंद सिंह रावत का कहना है कि मौजूदा दौर में युवाओं की जीवन-शैली पर से तकनीक बुरी तरह से हावी है।उसका ही सहारा लेते हुए, हर क्षण का आनंद परिवार केसाथ लेने के बजाय वह सैल्फी का सहारा लेकर यह दिखाना चाहता है कि उसका जीवन कैसा रहा है। हरिचंद गुप्ता आर्दश बालिका इंटर कालेज की प्रधानाध्यापिका पूनम रानी शर्मा की मानें तो तकनीक का इस्तेमाल करने में कोई बुराई नही है ,बस जरूरत है उसके सही इस्तेमाल की।वह मानती हैं कि तकनीक के हावी होने के बाद से परिवारों में दुरियां बढने लगी हैं।इसमें सभी उम्र के लोग शामिल हैं।पूर्व प्रधानाचार्य डीबीपीएस रावत का कहना है कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के अलावा जो आधुनिक युवाओं के जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव डाल रहे हैं वह है अन्य गैजेट्स और अन्य तकनीकी रूप से उन्नत उपकरण, जिन्होंने उनकी जीवन-शैली में बहुत बड़ा बदलाव लाया है।

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