नेल्सन मंडेला की करिश्माई नेतृत्व छमता सदैव की जायेगी याद – स्वामी चिदानंद

नेल्सन मंडेला की करिश्माई नेतृत्व छमता सदैव की जायेगी याद – स्वामी चिदानंद

ऋषिकेश-परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने शांति के लिये नोबेल पुरस्कार विजेता और दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति स्व. नेल्सन मंडेला की 103 वीं जन्मजयंती के पावन अवसर पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुये कहा कि नेल्सन मंडेला साहस, करुणा और स्वतंत्रता, शांति एवं सामाजिक न्याय के लिये प्रतिबद्धता के वैश्विक प्रतीक थे। शांति की स्थापना, रंगभेद उन्मूलन, मानवाधिकारों की रक्षा और लैंगिक समानता की स्थापना के लिये नेल्सन मंडेला ने सतत प्रयास किये।



गांधी-मंडेला फांउडेशन द्वारा मंडेला की 103 वीं जयंती पर आयोजित वेबिनाॅर में स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने विशेष वक्ता के रूप में सहभाग कर महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला को भावाजंलि देते हुये कहा कि इन दोनों महापुरूषों का जीवन एक नदी की तरह था। जिसमें अनगिनत धाराएं होती है शायद ही ऐसी कोई धारा हो; ऐसी समस्या हो जिनपर उनका ध्यान ना गया हो और जिनके लिए उन्होंने कोई समाधान प्रस्तुत ना किया हो। अफ्रीकी गांधी के रूप में पहचाने जाने वाले और रंग के आधार पर होने वाले भेदभाव को अपनी धरती से खत्म करने वाले नेल्सन मंडेला का पूरा जीवन बड़े संघर्ष से बीता परन्तु उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वे युवाओं के हमेशा प्रेरणास्रोत रहेंगे और उनके विचारों से दिशा मिलती रहेगी।

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