तीर्थ नगरी में धड़ल्ले से चल रहा है सफेद दूध का काला कारोबार!

तीर्थ नगरी में धड़ल्ले से चल रहा है सफेद दूध का काला कारोबार!

ऋषिकेश -अच्छी सेहत के लिए नियमित रूप से दूध पीने की सलाह घर के बड़े बुजुर्गों सहित चिकित्सकों द्वारा दी जाती है।लेकिन यदि दूध पीकर ही अस्पताल का रास्ता नापना पड़ जाये तो इसे क्या कहिएगा।जी हां विडंबना यही है कि सफेद दूध का काला कारोबार लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है।संपूर्ण आहार का पर्याय माना जाने वाला दूध मिलावटखोरों की चपेट में है। शहर से लेकर ग्रामीणांचल तक में दूध का गोरखधंधा फलफूल रहा है। मिलावटी व घटिया गुणवत्ता वाला दूध धड़ल्ले से बेंचा जा रहा है। हेरत की बात यह है कि कोरोनाकाल में भी सफेद दूध का काला कारोबार जारी है।खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी सिर्फ कागजों पर जांच-पड़ताल करते रहे हैं। जिससे मिलावटखोरी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।खाद्य सामग्री की गुणवत्ता परखने के लिए शासन ने नियमित तौर पर जांच-पड़ताल करने निर्देश जरूर जारी कर रखे हैं लेकिन इसका असर महज खानापूर्ति के लिए ही होता आया है।


अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ऋषिकेश में बारहों मास मिलावटी दूध लोगों को परोसा जाता है।शहर में दूध से मोटी मलाई काटने के चक्कर में मिलावटखोर सक्रिय हैं। फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक बाजारों में बिकने वाला 68.4 फीसदी दूध मिलावटी है। पानी के अलावा इसमें खतरनाक केमिकल की मिलावट की जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत यह भी है कि ऋषिकेश में रोजाना हजारों लीटर खुला दूध बेचा जाता है। इन दुकानों की जांच जिम्मेदार महकमे के अधिकारी आखिर क्यों नहीं करते हैं, यह बड़ा सवाल है।दिलचस्प यह भी है कि खुले दूध में मिलावट की संभावना सबसे अधिक होती है। विभागीय उदासीनता के बीच बड़ा सवाल यही है कि दूध का काला कारोबार करने वालों पर नकैल कसे तो फिर कसे केसे।

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