फेफड़ों के लिए ज्यादा घातक है कोरोना का ’डेल्टा प्लस वेरिएंट’ -प्रो रविकांत

फेफड़ों के लिए ज्यादा घातक है कोरोना का ’डेल्टा प्लस वेरिएंट’ -प्रो रविकांत

ऋषिकेश-कोविड गाइडलाइन के पालन को लेकर यदि लोग अब भी लापरवाह बने रहे तो कोरोना का ’डेल्टा वेरिएंट’ तीसरी लहर का कारण बन सकता है। इन हालातों में तीसरी लहर के खतरे को कम करने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश ने नागरिकों को कोविड नियमों का पालन गंभीरता से सुनिश्चित करने की सलाह दी है।


विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार डेल्टा वेरिएंट अभी तक विश्व के 100 देशों में पाया जा चुका है।एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि कोरोना वायरस के अन्य सभी वेरिएंटों की तुलना में डेल्टा प्लस वेरिएंट की वजह से फेफड़ों में कोविड निमोनिया का संक्रमण ज्यादा हो सकता है। यह भी संभावना है कि कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वेरिएंट में एंटीबाॅडी काॅकटेल’ जैसी दवा का भी शत- प्रतिशत असर नहीं हो पाए। लेकिन इतना जरूर है कि वैक्सीन लगा चुके लोगों में इसकी वजह से गंभीर किस्म के संक्रमण का कोई मामला फिलहाल भारत में नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि अब तक देश के 12 राज्यों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने कहा कि तीसरी लहर डेल्टा प्लस वेरिएंट के कारण आएगी, यह कहना अभी संभव नहीं है। गत माह एम्स ऋषिकेश द्वारा आईसीएमआर को भेजे गए कोविड के 15 सैंपलों में से एक में भी डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि नहीं हुई है। इन सैंपलों को रेन्डम के आधार पर एकत्रित किया गया था।

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