बीमार पशुओं के लिए फरिश्ता साबित हो रही है डॉ सपना बिष्ट!

बीमार पशुओं के लिए फरिश्ता साबित हो रही है डॉ सपना बिष्ट!

ऋषिकेश-श्यामपुर न्याय पंचायत के 16 गाँवों के लिए एक मात्र राजकीय पशु चिकित्सालय श्यामपुर की पशु चिकित्सा अधिकारी सुविधाओं के अभाव में भी अपनी सेवा कार्यो से ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों का दिल जीत रही हैं।


यह कहना है जिला गंगा सुरक्षा समिति के सदस्य और स्थानीय गौसेवक पर्यावरण विद विनोद जुगलान का।उन्होंने कहा कि जब सुबह वह अपने पालतू पशुओं की दवा के लिए राजकीय पशुचिकित्सालय पहुँचे तो वहाँ अस्पताल के बाहर लोग अपनी बारी की इंतजार में कोविड नियमों का पालन करते हुए गोल घेरे में खड़े थे।जबकि पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ सपना बिष्ट स्वयं बीमार पशुओं की सेवा में लगी हुई थी,कोविड संक्रमण को रोकने के लिए पी पी ई किट पहने उनका यह क्रम निरन्तर जारी था।भीड़ के बाद भी पसीने से तरबतर वह युवा महिला चिकित्सक सहज होकर स्वयं पशुओं की चिकित्सा में लगी हुई थी,जिसमे उनका स्टाफ उन्हें मदद कर रहा था।जब उनसे यह जानने की जिज्ञासा हुई कि आपको दिक्कत नही होती तो उन्होंने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा यह तो हमारा फर्ज है सरकार इसी बात का वेतन देती है।फिर परेशानी तो आजकल सभी को है।समझौता तो करना ही पड़ता है।आपको कोविड काल में किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है ?इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा वैसे तो कुछ ज्यादा नहीं पर आजकल परिस्थितियां विपरीत हैं बहुत कम लोग हैं जो दिक्कत समझते हैं।भीड़ ज्यादा होने से संक्रमण का खतरा बना रहता है।फिलहाल आवास भी यहीं है घर में बच्चा छोटा है।तो संक्रमण से बचना भी जरूरी है।कोविड के कारण पिछले एक साल से घर जाना नहीं हो पाया है।हमसे जितना हो सकता है फर्ज और सेवाभाव के साथ लगे रहते हैं।हालांकि स्टाफ कम होने से कार्यभार आजकल बढ़ गया है।पहले स्टाफ आठ लोग थे जबकि आजकल सिर्फ तीन लोग हैं।जिनमें एक फार्मासिस्ट, एक वेक्सिनेटर और एक पशुधन सहायक हैं।बाकि सभी स्थानांतरित हो चुके है जबकि जनसंख्या के हिसाब से पशुओं की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई है।ग्रामीणों के नाम सन्देश में उन्होंने कहा कि पशुपालकों को कोविड काल में थोड़ा धैर्य बनाये रखने की अपील की जासकती है चिकित्सालय आने से पूर्व कोविड नियमों का पालन करें भीड़ बढ़ाने से बचें मास्क लगाये, उचित दूरी अपनाएँ।बहुत जरूरी हो तभी अस्पताल आएं।फोन पर बात करके भी समाधान लिया जा सकता है।पर्यावरण विद विनोद जुगलान का कहना है कि सरकार को न केवल स्टाफ बढ़ाना चाहिए बल्कि जिस तरह हर विभाग को उच्च तकनीकी से लैस किया जा रहा है,उसी प्रकार राजकीय पशु चिकित्सालयों की ओर भी ध्यान देते हुए इनका आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए।ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले किसानों औऱ पशुपालकों को इसकाऔर अधिक लाभ मिल सके।

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