उत्तराखंड में पूर्ण लॉक डाउन ही अंतिम विकल्प-प्रदीप कोहली

उत्तराखंड में पूर्ण लॉक डाउन ही अंतिम विकल्प-प्रदीप कोहली

ऋषिकेश- कोरोना की बेकाबू रफ्तार लोगों की जिंदगियों पर कहर बनकर टूट रही है।उत्तराखंड में जिस तेजी से
कोरोना संक्रमण कम होने के बजाए लगातार बढ़ता जा रहा है।या यूं कहें कि नये रिकॉर्ड बनाता जा रहा है तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी।देहरादून जनपद में कोरोना का बड़ता ग्राफ सरकारी सिस्टम की फेलियर की कहानी बंया कर रहा है।देहरादून जनपद के ही ऋषिकेश में भी हालात कोई जुदा नही हैं।उत्तराखंड की इस देवभूमि में उत्तराखंड का एकमात्र एम्स स्थित होने के बावजूद यहां लगातार रिकॉर्ड तोड़ केस सामने आने से बैड फुल हैं और कोरोना संक्रमित लोग घरों पर ही उपचार करने को विवश हैं। स्वास्थ्य विभाग भी इतनी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज मिलने से परेशान हो गया है। हेरत की बात यह है कि कोरोना वायरस संक्रमण के आगे कोविड कर्फ्यू भी बेअसर नजर आ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि बाजारों में दोपहर 12 बजे तक लगने वाली भीड़ है, जिसके चलते कोरोना संक्रमण कम होने के बजाए लगातार बढ़ रहा है। शारीरिक दूरी का खुलकर उल्लंघन हो रहा है। दुकानों पर लोग भीड़ लगा रहे हैं। बाजारों में जाम ही जाम नजर आता है। इसके चलते कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा रिकॉर्ड तोड़ रहा है। कोरोना मरीजों की संख्या जिस तरह से यहां बढ़ रही है। वह बेहद गंभीर स्थिति है।



शासन द्वारा मनोनीत पार्षद प्रदीप कोहली ने कोरोना के बढ़ते ग्राफ पर चिंता जताते हुए कहा कि बाजारों में भीड़ है। न दो गज की दूरी का ध्यान रखा जा रहा है और न मास्क का उपयोग सभी लोग कर रहे हैैं। सैनिटाइजर का उपयोग भी कम नजर आ रहा है।उन्होंने कहा कि देहरादून जनपद देश के सर्वाधिक संक्रमित जनपदों में से एक है जहां संक्रमण दर करीब 30 प्रतिशत के करीब होकर बेहद चिंताजनक बनी हुई है। तीर्थ नगरी में भी संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके बाद भी हम जरा भी सचेत नहीं हैं और न ही चिंतित। यदि होते तो लगातार केस नहीं बढ़ते। उन्होंने कहा कोरोना के नए स्ट्रेन की चेन बनने लगी है। विशेषज्ञों के अनुसार अब संक्रमण ज्यादा तेजी से फैल रहा है। हम अब भी सचेत नहीं हुए और लापरवाही नहीं छोड़ी तो संक्रमण की गति कम नहीं हो सकेगी। हालांकि वह यह भीी मानते हैैं कि वर्तमान मेें गंभीर होती स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड में पूर्ण लाँकडाउन ही सरकार के पास अंतिम विकल्प बचा है।

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