धरा बचेगी तभी मानव अस्तित्व रहेगा सुरक्षित!

धरा बचेगी तभी मानव अस्तित्व रहेगा सुरक्षित!

ऋषिकेश-विश्व पृथ्वी दिवस पर पर्यावरण सुरक्षा का संदेश देते हुए उत्तराखंड के विख्यात पर्यावरण विद् विनोद जुगलान ने कहा कि ओजोन परत में बढ़ रहेे छिद्र से पर्यावरणको नुकसान हो रहा है।जिसके चलते तापमान बढ़ता जा रहा है इसके लिए हमें अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पृथ्वी में हम सभा प्राणी रहते हैं । प्राणियों में सहयोग करने की भावना बनाने की नितांत आवश्यकता है। हमें देने की प्रवृति पैदा करना होगी। पर्यावरण प्रदूषित हो गया है हमारा कर्तव्य है कि पेड़ लगाये और पेड़ को काटने वालों से बचाये। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ हम अन्याय कर रहे हैं। इसलिए हम दुख भोग रहे हैं। प्रकृति प्रदत चीजों का सामन्यजस बनाकर उसका उपयोग करना चाहिए जो धनात्मक हो। उन्होंने ने बताया कि तीन भाग पानी एक भाग पृथ्वी फिर भी पानी को लेकर हाहाकार मचा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान बढ़ रहा है जो चिंता का विषय है ।


विश्व पृथ्वी दिवस पर अपने विचार रखते हुए जीआईसी इंटरनेशनल के चेयरमैन गौरव गोयल बताया कि.आम तौर पर लोग सोचते हैं की पर्यावरण की समस्या केवल प्रदूषण है और पहाड़ों में पर्यावरण सम्बन्धी समस्याएं शहरों के मुकाबले कम हैं। परन्तु असलियत इसके ठीक विपरीत है।वायु प्रदूषण तो केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा है।जब जल, जंगल, जमीन, जानवर और जन – इनके बीच का रिश्ता और संतुलन बिगड़ जाता है तो हम इसको पर्यावरण संकट मान सकते हैं। इससे न केवल प्रकृति बल्कि मानव जीवन, समाज, अर्थव्यवस्था और यहाँ तक की हमारे मनोविज्ञान पर भी असर पड़ता है।साथ ही जलवायु परिवर्तन जैसी भयंकर समस्या के संकेत हिमालयी क्षेत्र जैसे संवेदनशील स्थानों में और तेज़ी से प्रकट हो रहे हैं जिनको हम अब अनदेखा नहीं कर सकते।उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में यह चर्चा हो रही है की यदि वनों का संरक्षण करना है तो स्थानीय समुदायों को इन संसाधनों पर अधिकार देने होंगे।पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों की भागीदारी अनिवार्य है।साथ ही कोई भी विकास की परियोजना और नीति बनाने में भी जनता और स्वयं सेवी समाज का पक्ष होना चाहिए।दूसरी तरफ केवल आर्थिक फायदा न देखते हुए सरकारों को बहु आयामी सोच के साथ आजीविका के साधन विकसित करने होंगे ताकि प्राकृतिक संतुलन बना रहे।

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