आस्था के महाकुंभ में मैली हुई गंगा,आचमन भी नही ले पा रहे श्रद्वालु!

आस्था के महाकुंभ में मैली हुई गंगा,आचमन भी नही ले पा रहे श्रद्वालु!

ऋषिकेश- राम तेरी गंगा तो पहले ही मैली हो गई थी अब इसका जल भी आचमन योग्य नहीं रहा है। जी हां यही कड़वी सच्चाई है अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ऋषिकेश की।





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महाकुंभ के दौरान भी यहाँ गंगा की स्थिति बदतर बनी हुई है ।आलम यह है कि नगर की हृदय स्थली त्रिवेणी घाट में आस्था की डुबकी तो छोड़िये मां गंगा का आचमन तक लेना श्रद्वालुओं के लिए मुश्किल हो रखा है। इससे देश विदेश से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरी चोट लग रही है।विडंबना यह भी है कि गंगा के ठेकेदार बनने वाले तमाम लोग इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं।
त्रिवेणी घाट को तीर्थनगरी की हृदयस्थली कहा जाता है। गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम कहे जाने वाले त्रिवेणी घाट पर मानसून काल को छोड़कर शेष अवधि में गंगा पक्के घाट से करीब सौ मीटर दूर चली जाती है। इससे त्रिवेणी घाट अपना आकर्षण खो देता है। त्रिवेणी घाट का विकास हरकी पैड़ी की तर्ज पर करने और गंगा की जलधारा को स्थायी रूप से घाट पर लाने के लिए तमाम घोषणाएं तो हुईं, मगर अभी तक इन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। इन सबके बीच महाकुंभ के नाम पर करोड़ो रुपये लगाये जाने के बावजूद गंगा की तस्वीर जस की तस बनी हुई है। महाकुंभ के दौरान गंगा की ऐसी बदतर तस्वीर देखने को मिलेगी ऐसा शायद ही किसी ने सोचा होगा मगर नजारा कुछ इस तरह का ही है जहां श्रद्धालुओं के लिए स्नान तो छोड़िए गंगा का आचमन तक लेना मुश्किल हो रखा है।गंगा के जलस्तर में कमी आने से धर्मनगरी के धार्मिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्ता के दृष्टिगत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं आम जनों द्वारा गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है। बहराल इन सबके बीच गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए केन्द्र सरकार की योजनाएं कब परवान चड़ेगीं यह फिलहाल अभी भविष्य के गर्भ में ही है ।

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