‘योगभूमि’उत्तराखंड’ में ही हाशिए पर ‘योग’ – डॉ राजे सिंह नेगी

‘योगभूमि’उत्तराखंड’ में ही हाशिए पर ‘योग’ – डॉ राजे सिंह नेगी

ऋषिकेश-पौड़ी योग ऐसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ राजे सिंह नेगी ने योग को नई शिक्षा नीति में अनिवार्य विषय के रूप में मान्यता दिलाने की मांग की है।उन्होंने कहा कि योग के गूढ रहस्यों को समझने और उसे अपनाने के लिए जहां दुनियाभर में होड़ मची हुई है वहीं इसका लाभ युवा पीढी को अभी भी पूरी तरह से नही मिल पा रहा है।उत्तराखंड सरकार भी योग के मामले में उदासीन रवैय्या अपनाए हुए है। उत्तराखंड सरकार से योग विषय को पाठ्यक्रम में स्वतंत्र विषय के रूप में मान्यता प्रदान करने एवम योग शिक्षकों को रोजगार देने की मांग करते हुए




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ऐसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ नेगी ने कहा कि योग को लेकर सिर्फ घोषणायें हुई हैं इनका क्रियान्वयन नहीं हुआ।उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा योग दिवस के अवसर पर राज्य में बीस हज़ार योग प्रशिक्षितों को रोजगार देने की कही बात हो या माध्यमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को एच्छिक विषय के रूप में शामिल करने की घोषणा या फिर वर्ष 2017 में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा उत्तराखंड को योग का बड़ा केन्द्र बनाये जाने का वादा हो या स्कूल से विश्वविद्यालय तक के पाठ्यक्रम में योग को शामिल करने और योग के क्षेत्र में रोजगार देने की घोषणा इस प्रकार पूर्व और वर्तमान सरकार द्वारा जो तमाम घोषणाऐं की गयी वो महज फिल्मी डायलॉग से अधिक कुछ भी साबित नहीं हो सकी। यही कारण है कि देव भूमी और योग भूमि के नाम से जाने जाने वाले राज्य उत्तराखंड में योग आज हाशिए पर है।

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