लोक परंपरा के साथ मनाया गया लोक पर्व फूल देई पर्व

लोक परंपरा के साथ मनाया गया लोक पर्व फूल देई पर्व

ऋषिकेश-लोक पर्व फूलदेई संक्रांति का पर्व तीर्थ नगरी में पारंपरिक ढंग से मनाया गया। तीर्थ नगरी के ग्रामीण क्षेत्रों में फूलदेई संक्रांति से पूरे माह तक दहलीज पर रंग बिरंगे फूल बिखरने की परंपरा भी है जो रविवार को फूलदेई संक्रांति से शुरू हो गई। महानगरों का रूप लेने के कारण यहां भी जीवन शैली महानगरों की तरह बदलने लगी है मगर ऋषिकेश में रहने वाले पर्वतीय मूल के अधिकांश लोग आज भी अपनी परंपराओं को पूरी शिद्दत के साथ निभा रहे हैं। ऋषिकेश के ग्रामीण क्षेत्र हरिपुर कला, रायवाला, गुमानीवाला, श्यामपुर, छिद्रवाला, 14 बीघा ढाल वाला क्षेत्र में भी कई जगह फूलदेई संक्रांति के साथ पूरे क्षेत्र में छोटे छोटे बच्चे इस परंपरा को निभाते हैं ।रविवार को फूल संक्रांति पर कई क्षेत्रों में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने समूह के साथ फूलदेई पर्व पर अपने व आसपास के घरों की दहलीज पर परंपरा अनुसार बसंत में खिलने वाले रंग बिरंगे फूल बिखेरे साथ ही प्रकृति से सुख शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। इसके साथ ही बच्चों की टोली ने परंपराओं में रचे बसे गीत फूल देई छम्मा देई,देणी द्वार,भरी भकार, ये देणी बारम्बार नमस्कार, पूजे द्वार बारम्बार, फुले द्वार गाकर लोगो की दहलीज पर फूल डाले।




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लोक संस्कृति से जुड़े अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा के अध्यक्ष डॉ राजे सिंह नेगी ने बताया कि फूलदेई संक्रांति हमारी परंपराओं से जुड़ा लोक त्योहार है। पहाड़ से पलायन के साथ हम अपनी संस्कृति व विरासत को भी भुला रहे हैं जो हमारी समृद्ध संस्कृति के लिए नुकसानदेह हैं। पर्व के मौके पर उन्होंने सभी लोगों से अपने तीज त्यौहार और परंपराओं का निर्वाहन करने की अपील की है।

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