योग रामबाण औषधि-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

योग रामबाण औषधि-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश- परमार्थ निकेतन में 32 वें आनॅलाइन अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के तीसरे दिन की शुरूआत प्रसिद्ध अमेरिकी ग्रैमी नामांकित संगीतकार जय उत्ताल के मधुर संगीत के साथ शुरू हुई। तत्पश्चात विख्यात योगगुरूओं द्वारा योग और ध्यान का अभ्यास कराया गया।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि ‘‘योग शब्द का अर्थ ‘एकत्व’ से है, जो संस्कृत धातु ‘युज्’ से बना है। युज अर्थात ‘जोड़ना’। आज हम सभी आनॅलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से जुड़े हैं। योग, भारतीय संस्कृति और ऋषियों की हजारों वर्षों तक की गयी अथक तपस्या का परिणाम हैं। महर्षि पतंजलि द्वारा रचित योगसूत्र में अष्टांग योग अर्थात योग के आठ आयाम-यम, नियम, आसन, प्रणायाम, धारणा, ध्यान, प्रात्याहार और समाधि के माध्यम से शारीरिक आसनों के साथ शरीर का आत्मा से, आत्मा का परमात्मा और प्रकृति से संयोग का संदेश दिया गया है। योग के साथ प्राणायाम और ध्यान का भी जीवन में विशेष महत्व है। प्राणायाम अर्थात प्राणों का आयाम और प्राण का अर्थ जीवन शक्ति से है एवं आयाम का अर्थ ऊर्जा पर नियंत्रण से है। श्वास लेने की विशेष क्रिया से प्राण पर नियंत्रण करना इससे जीवन में अद्भुत परिवर्तन होता है तथा आध्यात्मिक, शारीरिक और मानसिक रूप से मनुष्य स्वस्थ रह सकता है।





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स्वामी चिदानंद ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिये योगमय जीवन पद्धति बहुत जरूरी है। योग, अंतर्मुखी और बहिर्मुखी दोनों स्थिति में संतुलन स्थापित करता है। जब मन और शरीर अत्यधिक तनावग्रस्त हो तथा प्रदूषण एवं भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण रोगग्रस्त हो जाता है तब योग रामबाण की तरह कार्य करता है और आरोग्यता प्रदान करता है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है ‘‘योगः कर्मसु कौशलम्’’ अर्थात् योग से कर्मों में कुशलता आती है। उन्होंने कहा कि योग सिर्फ आसन तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह मनुष्य को आध्यात्मिक ऊँचाईयों तक पहुँचाता है।
डा साध्वी भगवती सरस्वती ने योग निद्रा के विषय में जानकारी देते हुये कहा कि योग निद्रा अर्थात गहरी विश्राम अवस्था जो शरीर और मस्तिष्क को आराम करने के लिये समर्पित एक अभ्यास प्रक्रिया है। इससे आन्तरिक चेतना जागृत और जागरूक होेती है। योग निद्रा जीवन की पूर्णता के लिए हमें जागृत करती है। इसकेे माध्यम से शरीर की पांच सूक्ष्म परतें शारीरिक, ऊर्जावान, मानसिक, सहज और आनंदित परतें खुलती है जिससे जीवन के सभी पहलुओं में स्थिरता, शांति और स्पष्टता आती है। जैसे-जैसे यह अभ्यास गहरा होता जायेगा इससे हम अपनी वास्तविक शक्ति की खोज कर सकते हैं। गौरतलब है कि परमार्थ निकेतन में होने वाला 32 वां वार्षिक अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव कोविड-19 के कारण 7 से 14 मार्च तक ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। विगत वर्षो की तरह ही विश्व के 25 से अधिक देशों के 90 से अधिक पूज्य संत, महापुरूष, विद्वान, योगाचार्य, योग जिज्ञासुओं, पर्यावरणविद्, संगीतज्ञ, योग जिज्ञासुओं का ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से मार्गदर्शन कर रहे हैं ताकि हजारों साधक इस महामारी के दौर में भी लाभांवित हों सके।

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