रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा बजट,गृहणियों का चढा पारा!

रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा बजट,गृहणियों का चढा पारा!

ऋषिकेश-रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने रसोई के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है।सरकार द्वारा दस दिनों के भीतर दो बार में 75 रूपये सिलेंडर में बड़ाए गये हैं इससे महंगाई दबे पांव फिर रसोई में घुस आई है। पिछले महीने जो गैस सिलिडर 713 रुपये में मिल रहा था उसके दाम लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले महीने रसोई गैस सिलिडर उपभोक्ताओं को 713 रुपये में मिला था। अब उसका दाम 788 रुपये पहुंच चुका है।
महिलाओं का कहना है कि खाद्य पदार्थों के दाम पहले से ही बढ़ रहे हैं। ऐसे में निम्न-मध्यम वर्ग के साथ मध्यमवर्गीय परिवारों का घरेलू बजट गड़बड़ा रहा है।





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कोरोना काल में आमतौर पर लोगों की आमदनी को बड़ा झटका लगा। दूसरा झटका महंगाई दे रही है। विभिन्न तरह की दालें, मसाले, खाद्य तेल आदि की कीमतें लगातार बढ़ रही है। अरहर, मूंग, उड़द, मसूर की दालों की कीमतें सौ रुपये प्रति किग्रा के करीब पहुंच गईं। सरसों तेल लगभग डेढ़ सौ रुपये किग्रा हो गया। इसी के आसपास रिफाइंड आयल की कीमत भी पहुंच गई है। दूसरी ओर रसोई गैस के दाम भी लगातार बढ़ रहे। पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी आसमान छूने की ओर हैं। ऐसे में निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों का घरेलू बजट गड़बड़ा गया है। उपभोक्ताओं की समझ में नहीं आ रहा कि रसोई का खर्च कैसे पूरा हो। उपभोक्ताओं का कहना है कि एक ओर रसोई गैस के दाम बढ़ रहे, वहीं दूसरी ओर इस पर मिलने वाली सब्सिडी लगातार कम होती जा रही है।प्राईवेट स्कूल की शिक्षिका रश्मि नौडियाल के अनुसार रसोई गैस की बढ़ती कीमतें चिंंतित करने वाली हैं। वैसे ही तमाम चीजों पर महंगाई से जूझना पड़ रहा। इस माह के शुरुआत में ही 25 रूपये की बढोतरी हुई थी अब सिलिडर के दाम में 50 रूपये और बढ़ गए हैं। पचास रुपये की बढ़ोतरी अखर रही है। इससे पूरी रसोई का बजट गड़बड़ा गया है।आई डी पी एल गीता नगर निवासी सवी शर्मा रैवानी के अनुसार रसोई गैस के बढ़ते दामों से घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। खानपान की अनेक चीजों के दाम पहले से ही बढ़े हुए हैं। आमदनी में तो कोई वृद्धि नहीं हो रही। ऐसे में रसोई का बजट लगातार बढ़ने से चिता हो रही है।समाजसेविका कुुसुम
जोशी ने रसोई गैस में सरकार द्वारा लगातार की जा रही मूल्यवृद्धि पर नाराजगी जताते हुए कहा कि रसोई गैस सिलिडर के तो दाम बढ़ते जा रहे लेकिन सब्सिडी घट गई है। अब तो रसोई गैस पर नाममात्र की सब्सिडी रह गई है। सिलिडर काफी महंगा लगने लगा है। सरकार को रसोई गैस के दाम नियंत्रित करने चाहिए।

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