हिंदी भाषा की सच्ची सेवा के साथ साहित्यकारों को मंच प्रदान करने में कामयाब रही है आवाज संस्था-डॉ सुनील दत्त थपलियाल

हिंदी भाषा की सच्ची सेवा के साथ साहित्यकारों को मंच प्रदान करने में कामयाब रही है आवाज संस्था-डॉ सुनील दत्त थपलियाल

ऋषिकेश- देवभूमि ऋषिकेश में प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था आवाज़ के द्वारा 20 वर्षों से हिंदी साहित्य के लिए बेहतरीन सेवा प्रदान जा रही है।संस्था समय समय पर नए-नए साहित्यकारों ,रचनाकारों को मंच प्रदान करती रही है। लेखकों की बेहतरीन साहित्य सृजन की भावना को आगे बढ़ाने के लिए संस्था प्रेरित करती हैं ।
संस्था के अध्यक्ष अशोक क्रेजी शर्मा ने कहा कि
हिंदी साहित्य के लिए समर्पित संस्था आवाज़ के दो दशकों के इतिहास पर दृष्टिपात करें तो देखने को मिलता है कि आवाज़ ने अनेक साहित्यिक संकल तैयार किए है जो पाठकों की खास पसंद बने है।
अनेक जेष्ठ व श्रेष्ठ साहित्यकारों के दिशा निर्देशन में पल्लवित पुष्पित संस्था ने शहर के अनेक नए साहित्यकारों को बेहतरीन कार्यशाला प्रदान कर मंच दिया जिसके माध्यम से अनेक कवि राष्ट्रीय स्तर तक के मंचों में संस्था व शहर का नाम रोशन कर रहे हैं।
संस्था द्वारा शहर के विद्यालयों में छात्र छात्राआँ के लिए साहित्यिक कार्यशालाएं आयोजित कर बाल साहित्य कारों के सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है ।





​banner for public:Mayor

संस्था के सदस्य एवं आवाज़ द्वारा साहित्यिक लाइव प्रसारण के संयोजक डॉ सुनील दत्त थपलियाल ने बताया कि संस्था ने वैश्विक महामारी कोरॉन्ना संकट के समय से ही आवाज़ पेज के माध्यम से साहित्य, संस्कृति, एवं संवाद की त्रिवेणी को तकनीकी के माध्यम से प्रसारित किया है जो अप्रैल 2020से अनवरत रूप से अभी तक प्रसारित किया जा रहा है। जिसमें संपूर्ण भारतवर्ष के साहित्यकारों एवं उत्तराखंड के संस्कृति प्रेमियों कलाकारों तथा संपूर्ण भारतवर्ष के संवाद के भगीरथ को जोड़ने का प्रयास किया गया है ।
इस प्रसारण के माध्यम से विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों साहित्यिक संस्थाओं के साहित्यकारों एवं संपूर्ण भारतवर्ष के साहित्य के लिए समर्पित होने वाले संस्थाओं के मुख्य लोगों को काव्य प्रसारण के लिए जोड़ा गया जिसका बेहतरीन परिणाम मिला है,
संस्कृति में उत्तराखंड के जाने-माने गायक कारों को एवं गीत कारों को जोड़ा गया है जिसमें गढ़ रतन नरेंद्र सिंह नेगी, मीना राणा, प्रीतम भरतवाण, रेखा धस्माना, पूनम शास्त्री, पूनम धौंडियाल ,मनोरमा धौंडियाल एवं अन्य सुदूरवर्ती कंदराओं में जो अपनी प्रतिभा को आगे नहीं बढ़ा सके उन लोगों को भी इस प्रसारण के माध्यम से उनकी प्रतिभा को लोगों के बीच लाने की कोशिश की गई,उन्होंने बता अनेक समसामयिक विषय पर संवाद किए गए जिसमें उत्तराखंड राज्य की आर्थिक स्थिति कोरोना संकट के समय विभिन्न प्रदेशों से आने वाले युवाओं के लिए रोजगार के अवसर नई शिक्षा नीति पर्यावरण स्वच्छता एवं विशेषकर कोरोना महामारी से कैसे बचाव किया जा सके विभिन्न चिकित्सा सेवा में लगे डॉक्टर एवं कर्मचारियों को संवाद से जोड़ा गया जिससे लोगों में जन जागृति फैल सके ।विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए नरेंद्र रयाल ने कहा कि संपूर्ण विश्व में तीसरे संख्या पर बोली जानी वाली हिंदी भाषा संपूर्ण विश्व में प्रसारित हुई है, आने वाले समय में यह अपना विशाल रूप प्राप्त करेगी ।
संस्था के उपाध्यक्ष आचार्य रामकृष्ण पोखरियाल एवं प्रबोध उनियाल ने बताया कि संस्था निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर है विषम से विषम परिस्थितियों में साहित्य का सृजन कर रही है नए साहित्यकारों को मंच प्रदान कर रही है और आने वाले समय में निश्चित रूप से आवाज साहित्यिक संस्था संपूर्ण भारत वर्ष में अपना नाम रोशन करेगी ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: