तीर्थ नगरी बनी हादसों का शहर, सड़के हो रही हैं खून से लाल

तीर्थ नगरी बनी हादसों का शहर, सड़के हो रही हैं खून से लाल

ऋषिकेश -मुम्बई की तरह तीर्थ नगरी भी हादसों के शहर के रूप मे तब्दील होती जा रही है।शहर की सड़के आयेदिन सड़क हादसों मे खून से लाल हो रही हैं।इन हादसों पर शहर का प्रशासन संवेदनहीन बना हुआ है।इससे सबक लेकर हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम न उठा पाना प्रशासनिक अदूरदर्शिता की और साफ इशारा कर रहा है।जबकि जबकि वर्ष के इन ग्यारह महीनों में सड़क दुघर्टनाओ के बड़ते ग्राफ के बीच अनेको घरों के चिराग अकाल मोत का ग्रास बने हैं।
धर्म नगरी भी मुम्बई की तर्ज पर हादसों के शहर के रुप मे तब्दील होती जा रही है।सड़क दुघर्टनाओ मे खून से आये दिन लाल हो रही सड़कों के बावजूद यहाँ प्रशासन संवेदनहीन बना हुआ है।

हेलमेट अभियान को लागू करने मे नाकाम रहा स्थानीय प्रशासन यातायात नियमों का अनुपालन कराने मे भी बुरी तरह से फ्लाप साबित होता रहा है।नतीजतन, वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण न होने की वजह से नगर मे सड़क दुघर्टनाओ का ग्राफ हर गुजरते वर्ष के साथ नीचे आने के बजाय लगातार बड़ता जा रहा है।दुर्भाग्यपूर्ण बात यह भी है कि नगर एवं यहाँ से सटे ग्रामीण इलाकों मे हुए सड़क हादसों मे करीब अस्सी फीसदी स्कूल -कालेज के छात्र अकाल मोत का ग्रास बने हैं।विडंबना यह भी है कि अधिकांश सड़क दुघर्टनाओ मे लापरवाही से की गई ड्राइविंग ही मुख्य वजह साबित होती रही है।लेकिन यहाँ का प्रबुद्ध समाज बेकाबू रफ्तार के साथ सड़कों पर बड़ता ट्रेफिक और अतिक्रमण के चलते सड़कों की कम होती चौडाई को भी सड़क हादसों के लिए जिम्मेदार बताता रहा है।नगर मे हरिद्वार रोड़,देहरादून रोड़,लक्ष्मण झूला मार्ग पर सबसे ज्यादा सड़क हादसे देखने को मिलते रहे हैं।जबकि ग्रामीण क्षेत्रों मे श्यामपुर रेलवे फाटक से रायवाला के मध्य और ऋषिकेश -देहरादून मार्ग पर रानी पोखरी से पहले सात मोड़ पर सबसे ज्यादा सड़क हादसों मे सड़कें खून से लाल होती रही हैं।अधिकांश हादसों मे हैड इंजरी ही हादसों का शिकार हुए लोगों जिनमें अधिकाश युवा थे जोकि अकाल मोत का ग्रास बने।अक्सर इस तरह के हादसों के बाद हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर सवाल उठते रहे लेकिन प्रशासन कोई माकूल जवाब नही खोज सका। सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन के पास फिलहाल कोई रणनीति नजर नही आ रही।ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि हादसों पर अंकुश लगे तो फिर लगे कैसे।

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