ग्रामीण जीवन का उत्थान तभी राष्ट्र का उत्थान – स्वामी चिदानन्द

ग्रामीण जीवन का उत्थान तभी राष्ट्र का उत्थान – स्वामी चिदानन्द

ऋषिकेश- आज के दिन वर्ष 1934 में महात्मा गांधी के संरक्षण में अखिल भारतीय ग्रामीण उद्योग संघ की स्थापना की गयी थी। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज का दिन आत्मनिर्भर युवा और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु प्रेरित करता है।

महात्मा गांधी जी के संरक्षण में अखिल भारतीय ग्रामीण उद्योग संघ की स्थापना दिवस इसी उद्देश्य से की गयी थी की भारतवर्ष, आत्मनिर्भर राष्ट्र बने। गांधी जी हमेशा कहा करते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है, इसलिए भारत को विकास के पथ पर ले जाने के लिए ‘ग्राम-विकास’ की अत्यंत आवश्यकता है। उनका मानना था कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी तो राष्ट्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। स्वामी जी ने कहा कि ग्रामीण जीवन का उत्थान’ तभी राष्ट्र का उत्थान सम्भव है।
स्वामी चिदानंद ने कहा कि किसी भी देश की उन्नति और विकास इस बात पर निर्भर करता हैं कि वह देश आर्थिक दृष्टि से कितनी प्रगति कर रहा है तथा औद्योगिक दृष्टि से कितना विकास कर रहा है। स्वामी चिदानंद ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के विकास के लिये केवल आर्थिक दृष्टिकोण ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि उसका नैतिक और आत्मिक विकास भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिये मानव और प्रकृति के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध नितांत आवश्यक है इसलिये हमें विकास का ऐसा मार्ग अपनाना होगा जो प्रकृति और पर्यावरण के अनुकुल है। हमें जैविक उत्पादों, जैविक खेती की ओर बढ़ना होगा।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसलिये आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता पर बल दिया है। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिये आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन जरूरी है। प्रकृति के अनुरूप विकास करने के लिये ग्रीड कल्चर से नीड कल्चर और ग्रीन कल्चर की ओर बढ़ना होगा। यूज एंड थ्रो कल्चर से यूज एंड ग्रो कल्चर की ओर बढ़ना होगा। हमें ग्रीन इन्डस्ट्री का निर्माण करना होगा। स्वामी जी ने कहा कि इन सब बदलावों के लिये पहले हमें अपने अन्दर बदलाव करना होगा और सकारात्मक बदलावों को स्वीकार करना होगा तभी हम एक हरित विश्व का निर्माण कर सकते है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि हमें ऐसे विकास पर जोर देना होगा जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करता हो तथा भावी पीढ़ी को भी अपनी आवश्यकताएँ पूरी करने के लिये किसी प्रकार का समझौता न करना पड़े इसका भी ध्यान रखना पड़ेगा।

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