डार्टस डेः मां-बाप का अभिमान और जीवन का साज होती हैं “बेटियां”

डार्टस डेः मां-बाप का अभिमान और जीवन का साज होती हैं “बेटियां”

ऋषिकेश-तीर्थ नगरी मैं बेहद उत्साह के साथ मनाया गया डार्टस डे । इस खास दिन पर अभिभावकों ने अपनी बेटियों को समाज में एक मुकाम हासिल करवाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने का लिया संकल्प। वैसे तो रिश्तो की गहराइयों को मापने के लिए किसी दिन विशेष की आवश्यकता नहीं होती लेकिन इस डे संस्कृति के दौर में फादर्स डे और मदर्स डे के साथ परिवार के लोगों के लिए डार्टस डे भी बहुत अहमियत रखता है। इसकी बानगी तीर्थ नगरी ऋषिकेश में आज खूब दिखाई दी। बेटी दिवस पर अपने घर की लाडली पर परिजनों ने जमकर प्रेम उड़ेला।गौरतलब है कि बेटियों के सम्मान का प्रतीक ये दिन भारत में हर साल सितंबर महीने के आखिरी रविवार को मनाया जाता है। बेटियों को प्यार जताने के लिए इस दिन को खास रूप से मनाते हैं। इस दिवस विशेष के माध्यम से बेटा एवं बेटी के भेद को मिटाने का संदेश दिया जाता है।

नगर के विख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ व समाजसेवी राजे सिंह नेगी के अनुसार एक समय था जब देश में बेटियों को गर्भ के भीतर ही मार दिया जाता था। नारी को लक्ष्मी मानने वाला ये समाज घर में बेटी के जन्म को अशुभ मानता था। मगर हालात बदले और पुरूष प्रधान देश में महिलाओं को भी समानता का दर्जा दिया जाने लगा। घर में ​बेटियों को बेटों के समान माना जाने लगा है,जोकि एक बेहतर संकेत है।उन्होने बताया उनकी दोनों बेटियां उनके लिए बेहद खास हैं। इस दिन को वे अपनी बेटियों के लिए बेहद खास तरीके से सेलिब्रेट करते हैं। एनजीओ चलाने वाली समाज सेविका निधि उनियाल डंगवाल ने बताया बेटों और बेटियों में फर्क समझने वाले अभिभावकों को समझना होगा कि बेटियां अनमोल हैं । लक्ष्मी का वरदान होती है बेटियां ,जिन घरों में बेटियों की कदर नहीं होती उन घरों में कभी खुशियों नहीं रहती। हांलाकि वह अभी भी मानती है कि बेटियों के सम्मान और उनको समाज में मजबूत मुकाम दिलाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना आवश्यक है।

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