इंजीनियरों को बनाना होगा विश्वकर्मा और भगीरथ – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

इंजीनियरों को बनाना होगा विश्वकर्मा और भगीरथ – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश- आज भारत के महान इंजीनियर सर मोक्षगुंगडम विश्वेश्वरैया का जन्मदिवस है। उन्ही की याद में इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। एक इंजीनियर के रूप में एम विश्वेश्वरैया ने बहुत से अद्भुत काम किये. उन्होंने सिन्धु नदी से पानी की सप्लाई सुक्कुर गाँव तक करवाई, साथ ही एक नई सिंचाई प्रणाली ‘ब्लाक सिस्टम’ को शुरू किया। इन्होने बाँध में इस्पात के दरवाजे लगवाए, ताकि बाँध के पानी के प्रवाह को आसानी से रोका जा सके। साथ ही मैसूर में कृष्णराज सागर बांध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उस समय भारत में वह सबसे बड़ा जलाशय था।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि विविधता में एकता ही भारतीय लोकतंत्र की विशेषता है। आजादी के पश्चात भारत ने बहुत विकास किया लेकिन किसी भी परिपक्व लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सामाजिक समरसता के धरातल पर कितना विकास हुआ। साथ ही गरीबी, निरक्षरता, सांप्रदायिकता, लैंगिक भेदभाव और जातिवाद को और किस प्रकार कम किया जा सकता है। स्वामी चिदानंद ने कहा कि भारत में व्याप्त भेदभावों को कम करने के लिये हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा।स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा, ’आज सभी ’’इंजीनियरों को भगीरथ बनने की जरूरत है’’। धरती पर भगीरथ पहले इंजीनियर थे जिन्होने भागीरथी गंगा को धरती पर लाया था। इसे भगीरथ का प्रयोग कहें या तपस्या जो भी हो वह इतनी विलक्षण थी की आज भी गंगा हमारे पास है और वह भारत की भाग्य विधाता भी है। अब हमें प्रयास करना है कि गंगा माँ धरती पर हमेशा बनी रहे। ऐसा न हो कि सरस्वती एक नदी थी की तरह गंगा भी एक नदी थी का ऐतिहासिक रूप प्राप्त कर लें। ऐसा न सुनना पड़े और आने वाली पीढ़ियों को ऐसा न पढ़ना पड़े कि गंगा अतीत की गोद में समा गयी अतः हम सभी को अपनी सामर्थ्य, शिक्षा एवं योग्यता के अनुसार नदियों, पर्यावरण एवं जल के संरक्षण के लिये कार्य करना होगा। जब देश की नदियों के पुनरूद्धार होगा तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह सकता है।’

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