तीर्थ नगरी की नैसर्गिक सुंदरता में वॉल पेंटिंग के जरिए निगम लगाएगा चार चांद-अनिता ममगाई

तीर्थ नगरी की नैसर्गिक सुंदरता में वॉल पेंटिंग के जरिए निगम लगाएगा चार चांद-अनिता ममगाई

गंगा तटों पर प्रकृति के श्रंगार का निगम ने तैयार किया प्लान

तीर्थाटन एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम ने नमामि गंगे को भेजा प्रस्ताव

ऋषिकेश- तीर्थ नगरी ऋषिकेश की खूबसूरती में चार चांद लगाने के लिए नगर निगम प्रशासन वॉल पेंटिंग का सहारा लेगा।अभिनव प्रयोगों के साथ तीर्थाटन एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है।शहर को खूबसूरत बनाने के लिए नगर निगम ने नमामि गंगे को साढे ग्यारह लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा है। शहर की दीवारों पर पोस्टर पुराने जमाने की बात होने जा रही है। स्वच्छता और शिक्षाप्रद वाँँल पेंटिंग शहर के मुख्य मार्गों और मुख्य स्थानों पर नजर आएगी।इसमें लोक संस्कृति की जहां झलक होगी वहीं देश की प्राचीनतम विधा योग से जुड़े महत्वपूर्ण आसनों को बेहद खूबसूूरत पेंटिंग्स प्रदर्शित कर प्रधानमंत्री की योग मुहिम को आगे बढ़ाया जाएगा।

नगर निगम महापौर अनिता ममगाई नेे बताया कि उन्होंने अपने चुनावी घोषणा पत्र में जनता से वादा किया था कि वह निगम क्षेत्र में भारतीय सभ्यता की पौराणिक एवं धार्मिक स्थलों का भव्यता पूर्वक व प्रमुखता से प्रदर्शित करने का प्रयास करेगी।इन तमाम घोषणाओं और वायदों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।उन्होंने बताया देवभूमि ऋषिकेश में तीर्थाटन एवं पर्यटन को बढ़ावा देने केेेे लिए निगम प्रशासन अभिनव प्रयोग करने जा रहा है।
पर्यटकों को लुभाने के लिए यहां त्रिवेणी घाट एवं आस्था पथ पर सेल्फी प्वाइंट बनाने की योजना का खाका तैयार किया गया है।
वहीं स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी चौक एवं आईएसबीटी परिसर में नंदा देवी राज यात्रा और योग से संबंधित चित्र बनवाये जायेंगे।
उन्होंने बताया कि शहर के महत्वपूर्ण स्थानों पर वॉल पेंटिंग के लिए शहर के उदयीमान कलाकारों को भी निगम मौका देगा।
स्वच्छता का संदेश भी इन पेंटिंग्स के माध्यम से दिया जायेगा।
नगर निगम महापौर ममगाई ने बताया कि शहर की गंगा तटों पर हरी-भरी पौधों से प्रकृति का श्रंगार करने की नगर निगम की योजना है ।
इसके अलावा यात्रियों एवं पथिको के विश्राम के लिए त्रिवेणी घाट और आस्था पथ पर उत्तराखंड की धरोहर को दर्शाते बेंच भी लगाए जाएंगे।
उत्तराखंड के वाद्य यंत्र ढोल दमाऊ, और राणसिंघा के चित्रों की सहायता से पर्यटकों को उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू कराएंगे।

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