निराश्रित पशुओं की सेवा में जुटे हैं वंदे मातरम ग्रुप के सदस्य

निराश्रित पशुओं की सेवा में जुटे हैं वंदे मातरम ग्रुप के सदस्य

ऋषिकेश-भूखे को भोजन और प्यासे को पानी पिलाने के कार्य से भी बढ़कर मूक और निराश्रित पशुओं की सेवा करना है। कहा जाता है कि गौ सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। इसी को प्रेरणा मानकर शहर के वंदे मातरम ग्रुप से जुड़े युवा गऊ सेवा के साथ तमाम निराश्रित पशुओं की सेवा करने में जुटे से हुए हैं।रात्रि के घनघोर अंधेरे में निराश्रित पशु दुर्घटना का शिकार ना हो जाए इसके लिए युवाओं द्वारा निराश्रित पशुओं को रिफ्लेक्टर बैण्ड भी बांधे जा रहे हैं।

देवभूमि ऋषिकेश में यू तों समाज सेवा करने वालों की कमी नहीं है लेकिन यहां युवाओं की एक टोली ऐसी भी है जो कि मुसीबत के समय किसी की भी मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। वैश्विक महामारी कोरोना के चलते लगे लाँकडाउन के दौरान वंदे मातरम ग्रुप से जुड़े तमाम सदस्य जहां रोजाना सैकड़ों लोगों के भोजन का प्रबंध महीनों तक करते रहे वहीं अब उन्होंने अपना फोकस निराश्रित पशुओं की सेवा में लगा दिया है। सड़कों किनारे निराश्रित पशुओं की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ग्रुप के सदस्यों द्वारा रात को निकल कर जगह-जगह निराश्रित पशुओं के गले में रिफ्लेक्टर बैंड भी बांधे जा रहे हैं। वंदे मातरम ग्रुप के संयोजक जितेंद्र पाल पाठी ने बताया कि तीर्थ नगरी में आवारा निराश्रित पशुओं को भूखे प्यासे घूमते देख कर मन व्यथित हो गया और उसी दिन से मन से उनके लिए चारा पानी की व्यवस्था करने का संकल्प कर लिया। अभियान की शुरुआत की तो पता चला अनेकों निराश्रित पशु विभिन्न स्थानों पर रात्रि में अंधकार पसरा होने की वजह से दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं जिस को रोकने के लिए अब उनके भोजन की व्यवस्था के साथ-साथ गले में रिफ्लेक्टर बैंड भी बांधा जा रहा है । उन्होंने बताया कि ग्रुप के सनी प्रजापति ,राहुल चौधरी, अभिषेक पारस, आदित्य पाल, प्रशांत शर्मा आदि को निराश्रित पशुओं की सेवा कर के देख अब अन्य लोग भी प्रेरित होकर पशुओं की सेवा में सहयोग करने लगे हैं। वंदे मातरम ग्रुप के संयोजक जितेंद्र पाल पाठी ने विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी आह्वान करते हुए कहा कि जिस प्रकार हम अपने बूढ़े माता पिता की सेवा करते हैं उसी प्रकार पशुओं की सेवा के लिए भी आगे आएं।

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