गंजेपन का शिकार हुए लोगों के लिए हेयर ट्रांसप्लांट वरदान-डॉ आशुतोष सिंह

गंजेपन का शिकार हुए लोगों के लिए हेयर ट्रांसप्लांट वरदान-डॉ आशुतोष सिंह

ऋषिकेश-तीर्थ नगरी ऋषिकेश में भी सफलतापूर्वक हो रहे हेयर ट्रांसप्लांट। ऋषिकेश के कई नामी-गिरामी हस्तियों ने गंजेपन से परेशान होकर महानगरों में हेयर ट्रांसप्लांट कराने के बजाय ऋषिकेश में ही हेयर ट्रांसप्लांट कराना बेहतर समझा और वह आज अपने निर्णय से संतुष्ट भी हैं।

व्यक्तित्व निखारकर उसे प्रभावशाली बनाने में बालों के योगदान को शायद ही कोई नकार सकता है। इसका सामाजिक-पारिवारिक जीवन के साथ ही प्रोफेशनल लाइफ पर भी पड़ता है।गंजेपन का शिकार होने के बाद पीड़ित में हीनता विकसित हो जाती है। लेकिन हेयर ट्रांसप्लांट ऐसे लोगों के लिए वरदान की तरह है। इस तकनीक से व्यक्ति न सिर्फ पहले जैसे बाल पा सकता है, बल्कि अपना खोया आत्म विश्वास भी प्राप्त कर सकता है।सिटी सैंटर में स्पर्श स्किन क्लीनिक एंड लेजर सैंटर चलाने वाले
प्लास्टिक सर्जन डॉ आशुतोष सिंह ने बताया कि हेयर ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें सिर के पीछे और दाढ़ी से बाल लेकर सिर के गंजेपन वाले स्थान पर लगाए जाते हैं। इन बालों को परिपक्व होने में तीन से चार महीने का समय लगता है। उसके बाद सिर के प्रभावित हिस्से पर प्राकृतिक बाल बढऩे लगते हैं। ट्रांसप्लांट के दौरान दाढ़ी व छाती के बाल भी लगाए जा सकते हैं, लेकिन जो बाल जैसा होगा वह उसी प्रकार से बढ़ेगा। व्यक्ति चाहे कितना भी बूढ़ा हो या गंजा, उसके सिर के पीछे, चेहरे की दाढ़ी या छाती पर बाल जरूर होते हैं। इसे परमानेंट हेयर जोन कहा जाता है। आमतौर पर यहीं से बालों को निकालकर प्रत्यारोपित किया जाता है।बकौल डा आशुतोष सिंह के अनुसार पुरुषों में होने वाले गंजेपन को मेल पैटर्न बॉल्डनेस या एन्ड्रोजेनेटिक एलोपीशिया कहा जाता है। इसमें पुरुषों के माथे की तरफ से या फिर सिर के ऊपरी हिस्से से बाल झडऩे लगते हैं। इसके बाद बालों की आकृति बिगडऩे लगते हैं और धीरे-धीरे पतले होने लगते हैं। उसके बाद वे झडऩे लगते हैं। जिस तरह से हमारे शरीर की त्वचा पर रोम होते हैं। ठीक वैसे ही सिर के ऊपर हेयर फॉलिकल्स होते हैं। इन्हीं में से बाल निकलते हैं। हेयर फॉलिकल्स जब तक स्वस्थ रहते हैं, बाल मजबूत बने रहते हैं, लेकिन हेयर फॉलिकल्स जब सिकुडऩे लगते हैं, तो बाल पतले होने शुरू हो जाते हैं। अगर इसका ख्याल नहीं रखा जाए तो यह समय के साथ गायब भी हो जाते हैं, जिसकी वजह से गंजापन होता है।डा आशुतोष सिंह के अनुसार.हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी के करीब दो सप्ताह बाद ही बाल उगने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। सर्जरी के बाद पूरे बाल आने में 7 से 10 महीने का समय लग जाता है।।उन्होंनेे बताया हेयर ट्रांसप्लांट से पहले व्यक्ति के बालों की पूरी केस स्टडी की जाती है। यह जाना जाता है कि इसके बाल क्यों गायब हुए, वजह क्या थी और किस प्रकार का उपचार दिया जाएगा। इसके बाद डोनर एरिया को भी पहचाना जाता है, जहां से बाल लिए जाते हैं। इसमें सिर और शरीर के बालों वाले हिस्सों से बालों के फॉलिकल्स निकालकर बाल रहित हिस्से में लगाए जाते हैं। ये बाल बिलकुल कुदरती बालों की तरह दिखाई देते हैं और उनकी तरह ही उगते है। इन्हें कटवा भी सकते हैं। जरूरत पड़े तो इन्हें रंगा भी जा सकता है और अपने अनुसार का स्टाइल भी दिया जा सकता है।

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