धर्मनगरी मे विकास के नाम पर हुआ है हरियाली मिटाने का काम

धर्मनगरी मे विकास के नाम पर हुआ है हरियाली मिटाने का काम
सड़कों के चौड़ीकरण के लिए पेड़ो पर चली थी आरियां, नही रोपें गये पौधे

ऋषिकेश -उत्तराखंड की देवभूमि ऋषिकेश मे यूं तो कुदरत ने हरियाली से खूब नवाजा है लेकिन विकास के नाम पर हरियाली को मिटाने का भी काम हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर सड़कों के किनारे खड़े पेड़ों को कुछ वर्ष पूर्व सड़कों के चौड़ीकरण के चलते आड़े आने की वजह से अनेको पुराने पेड काट दिए गए थे।

लेकिन विडम्बना देखिए उनके स्थान पर नए वृक्षों के लिए पौधरोपण का काम आज तक शुरू नही हो सका है।ऐसे मे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ऋषिकेश मे हरियाली बढ़ने की उम्मीद करना बेमानी सी लगती है।उल्लेखनीय है कि अर्धकुंभ के मद्देनजर कुछ वर्ष वर्ष पूर्व राष्ट्रीय राज मार्ग 58 के ऋषिकेश बद्रीनाथ मार्ग पर नेपाली फार्म से लेकर घाट चौराहे तक सड़कों के चौड़ीकरण के लिए अभियान चलाया गया था।इस दौरान विभिन्न प्रजातियों के सैकड़ों पेड़ो पर आरियां चली थी। चौड़ीकरण के लिए वन विभाग की अनुमति मिलने के बाद सड़क के दोनों ओर खड़े सैकड़ों पेड़ों का सफाया कर दिया गया। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात देखिए नही सड़कों का चौड़ीकरण पूरा हो सकता और नही ही जिन स्थानों पर पुराने पेड़ काटे गए, वहां नए पेड़ों के लिए अभी तक पौधारोपण ही कराया जा सका।जबकि एक शहर के इस सबसे महत्वपूर्ण मार्ग पर सड़क के दोनों और लगे पेड़ो से हमेशा हरियाली बनी रहती थी। जब हाईवे का चौड़ीकरण शुरू हुआ तो सड़क चौड़ी करने में आड़े आने वाले अधिकांश पेड़ काट दिए गए। हालांकि निर्माण की गति अत्यंत सुस्त होने की वजह से यह हाईवे अभी तक पूरा नहीं बन सका है। सफर की दिक्कतें भी बरकरार हैं। हालांकि पुराने पेड़ कटने की अनुमति सामाजिक वानिकी से इसी शर्त के साथ मिली कि जितने पेड़ काटे जा रहे, उससे दोगुनी संख्या में पौधरोपण किया जाएगा।लेकिन इतने वर्ष बीतने के बावजूद अब तक पौधरोपण की कोई शुरुआत तक देखने को नही मिली है।इसे लेकर पर्यावरणविदो् द्वारा लगातार चिंता जताई जाती रही है।समाजसेवी और पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिए लम्बे अर्से से काम कर रहे डा राजे नेगी का कहना है कि सड़को के चौड़ीकरण के बाद सफर तो आसान हो जाएगा लेकिन पेड़ों के बगैर जीना मुश्किल हो सकता है। वह कहते हैं कि जितनी संख्या में सड़कों के चौड़ीकरण के लिए पेड़ काटे गए, उससे दोगुनी संख्या में पौधारोपण हो और उसकी नियमित देखभाल की भी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे पौधे वृक्ष बन सकें, तभी पर्यावरण का संतुलन कायम रह सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most view news

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: