संग्रहालय और संस्कार दोनों को संजोने की आवश्यकता-चिदानंद मुनि

संग्रहालय और संस्कार दोनों को संजोने की आवश्यकता-चिदानंद मुनि

ऋषिकेश- परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर भारत की गौरवशाली परम्पराओं, विरासत के साथ पृथ्वी, पर्यावरण और जलस्रोत्रों के संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गौरवशाली विरासत के साथ श्रेष्ठ संस्कारों का संरक्षण भी नितांत आवश्यक है। जिस प्रकार हम संग्रहालयों में अपने पूर्वजों की यादों को संजोकर रखते है उसी प्रकार पूर्वजों के दिये संस्कारों को अपने जीवन में और अपने परिवार में संजोेेकर रखे।
स्वामी चिदानंद ने कहा कि बच्चों को संग्रहालय में रही वस्तुओं के माध्यम से भारत के इतिहास और संस्कृति से जोड़ा जा सकता है।उन्होंने कहा कि
संग्रहालयों में हमारे पूर्वजों की अनमोल यादों को संजोकर रखा जाता है। किताबें, पाण्डुलिपियाँ, रत्न, चित्र, शिलाचित्र और अन्य सामानों के रूप में तमाम तरह की वस्तुएं संग्रहालयों में हमारे पूर्वजों की यादों को ज़िंदा रखे हुई हैं। हर देश की संस्कृति को समझने के लिये इन वस्तुओं का विशेष योगदान होता हैं, जिन्हें संग्रहालयों में सुरक्षित रखा जाता है।

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